कवरेज इंडिया न्यूज़ ब्यूरो प्रयागराज
प्रयागराज/सतना। संगम नगरी में 'भैया जी का दाल-भात' परिवार के नाम से बड़े पैमाने पर लाइजनिंग और रसूख रखने वाले अतुल मिश्रा उर्फ गुड्डू मिश्रा के खिलाफ कानून का शिकंजा कस गया है। सतना (मध्य प्रदेश) की एक अदालत ने जाली दस्तावेजों के सहारे सरकारी लाभ लेने और धोखाधड़ी करने के जुर्म में गुड्डू मिश्रा समेत 9 आरोपियों को 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
जाली राशन कार्ड से खड़ा किया 'फर्जी' साम्राज्य
यह पूरा मामला जाली दस्तावेजों के आधार पर 'गंगा गृह निर्माण समिति' बनाने से जुड़ा है। अदालत में यह साबित हुआ कि आरोपियों ने उत्तर प्रदेश का निवासी होने के बावजूद सतना नगर पालिका के फर्जी राशन कार्ड तैयार किए और कूट रचित दस्तावेजों के जरिए समिति का पंजीकरण कराया। इस समिति के जरिए जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त कर भारी शासकीय लाभ अर्जित किया गया।
इन आरोपियों को मिली सजा
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश विकास भोंसले की कोर्ट ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड और सदस्यों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा पाने वालों में शामिल हैं:
- अतुल मिश्रा (गुड्डू मिश्रा) – निवासी धवारी, सतना।
- अनिल कुमार द्विवेदी (अध्यक्ष) – निवासी विद्यानगर, प्रयागराज।
- विंध्याचल चौरसिया – निवासी यमुनानगर, प्रयागराज।
- सुजीत सिंह – निवासी दाउदनगर, प्रयागराज।
- जगदीश सिंह – निवासी गंगोत्री नगर, प्रयागराज।
- इसके अलावा नीलम सिंह, हंसनारायण सिंह, धनेंद्र सिंह और अनिल सिंह को भी 5 साल की कैद हुई है।
9 साल बाद मिला न्याय: ऐसे खुला था राज
जालसाजी का यह खेल साल 2016 में शुरू हुआ था। स्थानीय निवासी रमेश पांडे ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से की थी। जांच में पता चला कि नगर पालिका ने कभी वो राशन कार्ड जारी ही नहीं किए थे, जिनका इस्तेमाल समिति बनाने में हुआ था। सिटी कोतवाली सतना में 23 नवंबर 2016 को मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन की ओर से जीपी धर्मेंद्र ने मजबूती से पक्ष रखा।
दो महिला आरोपी अब भी फरार
अदालत ने यह फैसला तब सुनाया है जब मामले की दो अन्य आरोपी माधुरी दीक्षित और उपमा सिंह अब भी फरार चल रही हैं। कोर्ट ने उनकी फेरारी में ही यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
लाइजनिंग के रसूख पर लगा दाग
वर्तमान में प्रयागराज में 'भैया जी का दाल-भात' के जरिए सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में पैठ बनाने वाले गुड्डू मिश्रा के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। 5 साल के सश्रम कारावास के इस आदेश के बाद अब उनके रसूख और लाइजनिंग नेटवर्क पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
