मोदी सरकार ने मुस्लिम संघठन PFI पर लगाया बैन, भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की थी साजिश, मिले अहम सबूत


कवरेज इंडिया न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: टेरर फंडिंग मामले की जांच का सामना कर रहे पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर बैन (Ban on PFI) लगा दिया गया है. दिल्ली-यूपी से लेकर देश के अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ एक्शन के बाद केंद्र सरकार ने UAPA के तहत इस संगठन को गैरकानूनी घोषित कर दिया है. सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पीएफआई पर पांच साल का बैन लगाया गया है. इतना ही नहीं, पीएफआई के अलावा उससे जुड़े अन्य आठ संगठनों पर भी बैन लगाया गया है. टेरर लिंक के आरोप में देश के कई राज्यों में पीएफआई पर लगातार छापेमारी के बाद केंद्र सरकार ने यह एक्शन लिया है.

ये पहला मौक़ा था जब किसी कट्टरपंथी संगठन के दस्तावेज़ों में भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए लक्ष्य निर्धारित कर योजनाबद्ध करवाई के लिखित सबूत मिले हैं. ख़ुफ़िया एजेंसियां तब और चौकी जब यहां से बरामद दस्तावेज़ों में तुर्की, पाकिस्तान और मुस्लिम देशों से मदद लेने की योजना भी इन दस्तावेज़ो में मिली. यहां से ही खुलासा हुआ कि पीएफ़आई अब एक कट्टरपंथी संगठन से आगे निकल कर देश को तोड़ने और सांप्रदायिक उन्माद भड़का कर देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की और बढ़ चला है.


गृह मंत्रालय ने पीएफ़आई के बारे में क्या-क्या कहा : 10 बातें

- पीएफ़आई और इसके सहयोगी संगठन व संस्थाओं- रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (एआईआईसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (एनसीएचआरओ), नेशनल वुमन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल को पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है.

- केंद्र सरकार ने ग़ैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 3 की उप-धारा (1) के तहत पीएफ़आई, उससे जुड़े संगठन और संस्थाओं को पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया है.

- पीएफआई, इसके सहयोगी संगठन और इससे जुड़ी संस्थाएं सार्वजनिक तौर पर एक सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संगठन के रूप में कार्य करते हैं लेकिन ये गुप्त एजेंडा के तहत समाज के एक वर्ग को कट्टर बनाकर लोकतंत्र की अवधारणा को कमज़ोर करने की दिशा में काम करता है और देश के संवैधानिक प्राधिकार और संवैधानिक ढांचे के प्रति अनादर दिखाते हैं.

- पीएफआई कई आपराधिक और आतंकी मामलों में शामिल रहा है और ये देश के संवैधानिक प्राधिकार का अनादर करता है. साथ ही ये बाहर से फंडिंग लेकर देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा ख़तरा बन गया है.

- पीएफ़आई के वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ संपर्क के कई उदाहरण हैं. पीएफ़आई के कुछ सदस्य आईएसआईएस में शामिल हुए और सीरिया, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में आतंकी कार्यकलापों में भाग ले चुके हैं. पीएफ़आई के कुछ काडर इन देशों के संघर्ष क्षेत्रों में मारे गए हैं. कई काडर को राज्य और केंद्रीय पुलिस ने गिरफ़्तार किया है.

- पीएफ़आई का संबंध आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश से भी रहा है. पीएफ़आई के कुछ संस्थापक सदस्य स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया यानी सिमी के नेता रहे हैं. ये दोनों ही प्रतिबंधित संगठन हैं.

- पीएफआई कई आपराधिक और आतंकी मामलों में शामिल रहा है और ये देश के संवैधानिक प्राधिकार का अनादर करता है. साथ ही ये बाहर से फंडिंग लेकर देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा ख़तरा बन गया है.

- पीएफ़आई काडर कई आतंकवादी गतिविधियों और कई व्यक्तियों, मसलन- संजीत (नवंबर 2021), वी. रामालिंगम (2019), नंदू (2021), अभिमन्यू (2018), बिबियन (2017), शरत (2017), आर. रुद्रेश (2016),, प्रवीण पुजारी (2016), शशि कुमार (2016) और प्रवीण नेत्तारू (2022) की हत्या में शामिल हैं. ये हत्याएं सार्वजनिक शांति भंग करने और लोगों के मन में भय पैदा करने के इरादे से की गईं.

- पीएफ़आई के पदाधिकारी, काडर और इससे जुड़े अन्य लोग बैंकिंग चैनल, हवाला, दान के ज़रिए सुनियोजित अपराधिक षड्यंत्र के तहत भारत के भीतर और बाहर से फंडिग जुटा रहे हैं और फिर उस धन को वैध दिखाने के लिए कई खातों के माध्यम से उसकी लेयरिंग, एकीकरण करते हैं और इस तरह देश में अलग-अलग आपराधिक और ग़ैर-कानूनी, आतंकी कामों के लिए इस फंडिंग का इस्तेमाल करते हैं.

- पीएफ़आई की ओर से उनसे संबंधित कई बैंक खातों में जमा पैसे के स्त्रोत खाताधारकों के वित्तीय प्रोफ़ाइल से मेल नहीं खाते और पीएफ़आई के काम भी उसके घोषित उद्देश्यों के अनुसार नहीं पाए गए. इसलिए आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम 1961 की धारा 12-ए के तहत मार्च 2021 में इसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था. और इससे जुड़ी संस्था रिहैब इंडिया फ़ाउंडेशन का रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया था.

इन संगठनों पर भी लगा बैन

 रिहैब इंडिया फाउंडेशन

कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया

ऑल इंडिया इमाम काउंसिल

नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन

नेशनल विमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट

एम्पावर इंडिया फाउंडेशन

रिहैब फाउंडेशन(केरल) 

 जूनियर फ्रंट

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