BJP ऑफिस में मुझे गार्ड रखना होगा तो अग्निवीर को दूंगा प्राथमिकता : कैलाश विजयवर्गीय




कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क

अग्निपथ योजना को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। कई जगह हिंसक प्रदर्शन भी हुए हैं। इस बीच बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान आया है, जो काफी वायरल हो रहा है। इस बयान पर आपत्ति भी जताई जा रही है। अग्निपथ योजना का फायदा बताते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि बीजेपी के ऑफिस में सिक्योरिटी रखना है तो मैं अग्निवीर को प्राथमिकता दूंगा। अपने बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया के बाद विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि ‘‘टूलकिट'' गिरोह से जुड़े लोग उनके कथन को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करके ‘‘कर्मवीरों'' के अपमान की कोशिश कर रहे हैं। विजयवर्गीय ने इंदौर के भाजपा कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सेना के प्रशिक्षण में अनुशासन एवं आज्ञा का पालन करना सबसे प्रमुख है, और अग्निपथ योजना के तहत सेवा के दौरान युवाओं में दोनों गुणों का विकास होगा। उन्होंने कहा कि जब कोई युवा सेना में अग्निपथ योजना के तहत प्रशिक्षण लेगा और चार साल की सेवा के बाद निकलेगा तो 11 लाख रुपये उसके हाथ में होंगे और वह अपनी छाती पर अग्निवीर का तमगा लगाकर घूमेगा।

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भाजपा महासचिव ने आगे कहा, ‘‘मुझे अगर भाजपा के इस कार्यालय में सुरक्षा रखनी है, तो मैं (पूर्व) अग्निवीर को प्राथमिकता दूंगा।'' दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा सांसद वरुण गांधी समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने विजयवर्गीय के इस बयान पर निशाना साधा है।

अपने बयान पर बवाल मचने के बाद विजयवर्गीय ने ट्वीट कर सफाई दी,‘‘अग्निपथ योजना से निकले अग्निवीर निश्चित तौर पर प्रशिक्षित एवं कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध होंगे। सेना में सेवाकाल पूर्ण करने के बाद वे जिस भी क्षेत्र में जाएंगे, वहां उनकी उत्कृष्टता का उपयोग होगा। मेरा आशय स्पष्ट रूप से यही था।'' उन्होंने आगे कहा, ‘‘टूलकिट गिरोह से जुड़े लोग मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करके कर्मवीरों का अपमान करने की कोशिश कर रहे हैं। यह देश के कर्मवीरों का अपमान होगा। राष्ट्रवीरों-धर्मवीरों के खिलाफ इस टूलकिट गिरोह के षड़यंत्रों को देश भली भांति जानता है।''

ट्वीट कर लिखा-बयान को तोड़ मरोड़कर पेश कर रहे हैं लोग

विरोध के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर लिखा, अग्निपथ योजना से निकले अग्निवीर निश्चित तौर पर प्रशिक्षित एवं कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध होंगे, सेना में सेवाकाल पूर्ण करने के बाद वह जिस भी क्षेत्र में जाएंगे वहां उनकी उत्कृष्टता का उपयोग होगा। मेरा आशय स्पष्ट रूप से यही था। टूलकिट से जुड़े लोग मेरे बयान को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करके कर्मवीरों का अपमान करने की कोशिश कर रहे हैं। यह देश के कर्मवीरों का अपमान होगा। राष्ट्रवीरो-धर्मवीरों के ख़िलाफ़ इस टूलकिट गैंग के षड्यंत्रों को देश भली भांति जानता है।

योजना को लेकर फैलाया जा रहा है भ्रम

अग्निवीर योजना को लेकर रविवार को भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस योजना को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। यदि सेना में 21 साल ने कोई जवान भर्ती होगा और 25 साल में रिटायर हो जाएगा तो वह अग्निवीर का तमगा लेकर घूमेगा। यदि मुझे भी इस भाजपा दफ्तर में सिक्योरिटी रखने की जरुरत पड़ी तो हम अग्निवीरों को रखेंगे। विजयवर्गीय ने कहा कि वर्तमान में 32 हजार पूर्व सैनिक देश में है। क्या आपने कभी किसी सैनिक को आंतकवादी गतिविधियों व गलत कार्यों में लिप्त पाया है। उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना कोई राजनीतिक फैसला नहीं है। बल्कि यह तीनों सेनाध्यक्षों ने साथ मिलकर एक प्रस्ताव बनाया है, जो केंद्र सरकार को भेजा है। दुनिया के अलग-अलग देशों में सेना में युवाओं को कान्ट्रैक्ट पर रखा जाता है। वहां पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है। बल्कि चार साल की नौकरी खत्म होने के बाद केंद्र सरकार 12 लाख रुपये भी दे रही है। योजना को गलत तरीके से समझा जा रहा है।

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विजयवर्गीय ने सरकार की उक्त योजना को लाभकारी बताते हुए कहा कि चार साल की सेवा के बाद जब वह बाहर निकलेगा तो 11 लाख रु. उसके हाथ में होंगे। वह छाती पर अग्निवीर का तमगा लगाकर घूमेगा। फौजी विश्वास का नाम है, फौजी पर लोगों को विश्वास है। विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि अग्निपथ योजना का निर्णय पॉलिटिकल नहीं है। यह तीनों सेना के अध्यक्षों व उनकी टीम का सरकार को सुझाव है। कारगिल व किसी भी प्रकार के युद्ध के बाद हमारे देश में एक कमीशन बैठता है जो तय करता है कि क्या खोया और क्या पाया। आयोग ने पाया कि हमारी सेना की एज कम होना चाहिए। 

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यह उस कमीशन की रिपोर्ट है और तब से ही प्रक्रिया चल रही है, लगभग 20 वर्षों से। यह कोई एक दिन का निर्णय नहीं है। यह तीनों सेना अध्यक्षों, उनकी टीम व रिटायर्ड सेना के अधिकारियों के माध्यमों से लिया गया निर्णय है। हमें गर्व है कि हमारी सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है लेकिन एक कमी है। अमेरिका की सेना की एवरेज एज 25 से 26 वर्ष है। रशिया, फ्रांस व चाइना की भी लगभग इतनी ही है। कहने में यह आता है कि वहां की सेना युवा है जबकि भारत की सेना की एवरेज 32 वर्ष है। इसके कारणों को खोजा गया तो पता चला कि वहां पर तीन, चार, पांच, आठ साल में कांट्रैक्ट पर सेना में कोई भी काम कर सकता है। ये सुविधाएं चाइना, अमेरिका, फ्रांस व रशिया में हैं।

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