अमेरिका के टैरिफ का अब शुरू हुआ भारत पर असर, टैरिफ से 10 लाख नौकरियों को खतरा, पढ़िए विस्तार से


कवरेज इंडिया न्यूज़ ब्यूरो 

व्यापारियों और उद्यमियों के प्रमुख संगठन, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव को लेकर गहरी चिंता जताई है। सीटीआई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। संगठन का मानना है कि अमेरिका को 'सबक सिखाना' जरूरी है, ताकि वह एकतरफा और अन्यायपूर्ण व्यापारिक नीतियां न थोप सके।

किन क्षेत्रों पर होगा सबसे ज्यादा असर?

सीटीआई के मुताबिक, अगर अमेरिका यह टैरिफ लागू करता है, तो भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर इसका सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा। इनमें मुख्य रूप से टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग) और रत्न-आभूषण शामिल हैं। ये दोनों ही क्षेत्र बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं। सीटीआई का अनुमान है कि इस टैरिफ के कारण इन सेक्टर्स में 10 लाख से अधिक नौकरियों पर संकट आ सकता है।

क्यों लग सकता है यह टैरिफ?

यह मामला अमेरिका और भारत के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव का हिस्सा है। अमेरिका का आरोप है कि भारत अपनी कुछ घरेलू नीतियों के तहत अमेरिकी कंपनियों और उत्पादों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी के जवाब में अमेरिका ने यह भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, भारत का कहना है कि उसकी नीतियां विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप हैं।

सरकार के सामने क्या हैं चुनौतियां?

प्रधानमंत्री मोदी के सामने अब एक बड़ी चुनौती है। उन्हें न सिर्फ अमेरिकी टैरिफ से भारतीय उद्योगों को बचाना है, बल्कि व्यापारिक संबंधों को भी संतुलित रखना है। अगर भारत अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध की स्थिति बन सकती है। ऐसे में सरकार को सावधानीपूर्वक कदम उठाना होगा, ताकि घरेलू रोजगार और अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर न पड़े। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार सीटीआई की मांग को मानते हुए अमेरिका के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाएगी या फिर बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करेगी।

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