}(document, "script")); Prayagraj : बारिश न होने के कारण धान के खेतों में पड़ने लगी दरार, नहरों में पानी न छोड़ा गया तो इस बार चौपट हो जाएगी खेती - By Coverage India

Prayagraj : बारिश न होने के कारण धान के खेतों में पड़ने लगी दरार, नहरों में पानी न छोड़ा गया तो इस बार चौपट हो जाएगी खेती - By Coverage India



कमलेश तिवारी संवाददाता कवरेज इंडिया 

Prayagraj Coverage India ।  धान का कटोरा कहे जाने वाले लेड़ियारी और खीरी एवं लालतारा इलाके में इस साल कम बारिश के चलते सूखे जैसे हालात पैदा होने लगे हैं । शुरू में तो अच्छी बरसात हुई थी । मगर जब धान की फसल को पानी की आवश्यकता है तो अब वर्षा नहीं हो रही है । इसके कारण मुरझाने लगी है । कई इलाकों में धान की फसल पीली पड़ने लगी है । धान के खेतों में दरार पड़ने लगी है । दरअसल मौसम के दगा देने के साथ ही नहरों में भी पानी नहीं है । नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है । यही नहीं नलकूप न होने के कारण धान की फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है । 

बारिश कम होने पर किसान किसी तरह नहरों और नलकूपों से फसल की सिंचाई कर लेते थे । मगर इस बार मौसम के साथ ही नहरें भी दगा दे रही हैं । हालात यह हो गई  कि जिले में सबसे अच्छी धान की किस्म पैदा करने वाले लेड़ियारी और खीरी एवं लालतारा इलाके में ज्यादातर नहरें सूखी पड़ी है । नहरों में जेठ सरोखी धूल भादौ माह में भी उड़ रही है । अधिकांश क्षेत्र की नहरों व माइनरों में पानी के न पहुंचने के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है । 

किसान अपनी धान की मुरझाती फसल को देख चिंतित हैं । किसान बताते है कि धान की रोपाई तो  कुछ लोग वे किसी तरह कर लिए थे । मगर अब फसल की सिंचाई नहीं हो पाने के कारण सूखने लगी । बता दें किहुंनी कला, किहुंनी खुर्द, गड़री, महुली, पालपट्टी, कोटर, रेंगा, बिसौरा, बड्डिहा, गुलालपुर, चंद्रोदया, सुजनी, कौहट, जानकी तारा, बहरैचा, धोबहट, चैलारी, खोचा,  इटवा, सिरहिर, पटेहरा, दसौती, चांद, मोजरा, बैजला, खूटां आदि गांवों में नहर में पानी नहीं है । इसके कारण किसानों में हाहाकार मचा हुआ है ।

शासन द्वारा नहर विभाग के उच्चाधिकारियों के सख्त निर्देश है कि सभी नहरों में पानी टेल तक पहुंचने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाएं, लेकिन क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ने का शासन के निर्देश का अनुपालन नहीं हो पा रहा है ।

महंगी पड़ रही पंपिग सेट से सिंचाई ।

 पालपट्टी के किसान लल्लू प्रसाद त्रिपाठी, कोटर के रजनीश तिवारी, मोजरा के किसान नन्दू प्रसाद सिंह पटेल, गड़री के रमेश तिवारी  ,बहरैचा शंकर दयाल तिवारी,  कैथवल दया शंकर द्विवेदी , विजय भुर्तिया , बबलू भुर्तिया, धोबहट राम बली बिंद, दिन बंधु बिंद, शांति प्रसाद सिंह पटेल, बृजनेश पाल, डॉ, अनील कुमार सिंह, अरूण कुमार तिवारी, सुरेश सिंह आदि लोगों का   कहना है कि डीजल महंगा होने के कारण पंपिग सेट से सिंचाई काफी महंगी पड़ रही है । इसके कारण किसान निजी पंपों से भी सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं । किसान बारिश होने और नहरों में पानी छोड़े जाने का इंतजार कर रहे हैं ।

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