}(document, "script")); 48 घंटे में ही दिखा 'कवरेज इंडिया' की खबर का असर: सीआईबी व RPF ने छापेमारी कर एक टिकट दलाल को दबोचा, सरगना पप्पू धोबी अभी भी पहुंच से बाहर

48 घंटे में ही दिखा 'कवरेज इंडिया' की खबर का असर: सीआईबी व RPF ने छापेमारी कर एक टिकट दलाल को दबोचा, सरगना पप्पू धोबी अभी भी पहुंच से बाहर


कवरेज इंडिया न्यूज़ ब्यूरो जंघई 

जंघई आरक्षण केंद्र पर धड़ल्ले से चल रही टिकट दलाली के संदर्भ में देश के प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल कवरेज इंडिया ने पिछले दिनों प्रमुखता से खबर दिखाया था जिसके बाद सीआईबी एवं आरपीएफ की टीम द्वारा संयुक्त छापेमारी में एक टिकट दलाल को रंगे हाथों पकड़ कर चालान कर दिया गया है। कवरेज इंडिया ने अपनी खबर के माध्यम से यह खुलासा किया था कि किस प्रकार से जंघई आरक्षण केंद्र पर क्षेत्र के सबसे पावरफुल दलाल पप्पू धोबी और उसकी टीम द्वारा आरपीएफ एवं जीआरपी से सांठगांठ कर टिकट दलाली को अंजाम दिया जा रहा है जिससे आम जनमानस को कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा प्रतीत होता है। बता दें कि आरक्षण केंद्र पर दलाल और संबंधित अधिकारियों की ऐसी सांठगांठ है कि आम जनता को कन्फर्म टिकट उपलब्ध नहीं होता वही दलालों के माध्यम से बड़े ही सुगम तरीके से कंफर्म टिकट उपलब्ध करा दिया जाता है लेकिन बदले में तीन से चार गुना पैसे देने पड़ते हैं। 

इसी खबर पर हुई कार्यवाही जंघई। आरपीएफ और जीआरपी में ऊंची पहुंच के चलते खुलेआम टिकट दलाली कर रहा है पप्पू धोबी, आम नागरिक 500 का टिकट 5000 में लेने को मजबूर

स्थानीय लोगों और पीड़ितों की माने तो पप्पू धोबी जिले का ही नहीं बल्कि आसपास के 4 से 5 जनपदों का सबसे बड़ा टिकट दलाल है, इसकी पहुंच का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि हर बार जब टिकट दलालों पर कार्यवाही होती है तो सिर्फ और सिर्फ एक दो गुर्गों को पकड़कर खानापूर्ति कर दी जाती है जबकि हर बार पप्पू धोबी साफ बच जाता है। स्थानीय लोगों की मानें तो पप्पू धोबी पिछले कई वर्षों से जंघई आरक्षण केंद्र भदोही, प्रयागराजz जौनपुर आदि सहित कई स्टेशनों के रेलवे आरक्षण केंद्र पर सक्रिय रुप से टिकट दलाली का काम कर रहा है। आरपीएफ जीआरपी एवं अंदर बैठे अन्य अधिकारी पप्पू धोबी पर कार्यवाही करने से इसलिए भी बचते हैं क्योंकि प्रत्येक माह उन्हें इस दलाल द्वारा मोटा कमीशन प्राप्त होता है। फिलहाल जंघई आरक्षण केंद्र पप्पू धोबी नामक टिकट दलाल के चंगुल से कब छूट पाती है यह कहना मुश्किल है। 

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