}(document, "script")); 'जेल में जाकर मिलो' अतीक के बेटे असद का एक और ऑडियो वायरल, एनकाउंटर से पहले व्यापारी को धमकी दे रहा था? पढ़ें यहां...

'जेल में जाकर मिलो' अतीक के बेटे असद का एक और ऑडियो वायरल, एनकाउंटर से पहले व्यापारी को धमकी दे रहा था? पढ़ें यहां...


कवरेज इंडिया न्यूज़ ब्यूरो प्रयागराज 

प्रयागराज:  Atiq Ahmed son Asad Audio recording : अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ हत्याकांड के बाद माफिया राज का काला चिट्ठा खुल रहा है. अतीक अहमद जेल से लोगों को धमकियां देता था और उसका बेटा असद उन धमकियों को ग्राउंड स्तर पर एक्शन लेता था. उमेश पाल हत्याकांड में असद का नाम सामने आया और पुलिस ने झांसी एनकाउंटर में उसे मार गिराया. इस बीच असद की दो ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है. इसमें असद फोन पर बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम को धमकी दे रहा है. आइये सुनते हैं दोनों के बीच क्या बातचीत हुई है...  (Atiq Ahmed son Asad Audio recording)


पहली ऑडियो रिकॉर्डिंग


असद : हेलो

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : फोन किए थे 

असद : ये कह रहे थे कि उमर भाई साहब से जेल में मिलना गया था. वे ये चाहते हैं कि आप उनसे मिल लीजिए. पांच तारीख को पेशी के लिए आ रहे हैं. आप टाइम निकालकर वहीं पर उनसे मुकालात के लिए आ जाते 

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : यार हमको कचहरी में मत बुलाओ, समझो


असद : क्या हो गया कचहरी में

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : कचहरी में थोड़ा ठीक नहीं रहता है, कचहरी हम जाते भी नहीं हैं. 


असद : जेल चलिये हमारे साथ

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : जेल नहीं जा पाऊंगा, कोई मैसेज हो तो बता दो, जो करना होगा कर देंगे.


असद : तो कैसे मुकालात होगी

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : जहां कहोंगे हम और तुम मुलाकात कर लेंगे. 


असद : उमर भाई से मिलना है आपको...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : उमर से मिलना है तो चलो हम देखते... चूंकि कहचरी हम बहुत कम जाते हैं.. एक बार वहां उन लोगों से मुलाकात हो गई थी.. कोई मैसेज हो तो बता देना


असद : हम क्या बताए... एक कहावत है कि खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : मतलब समझे नहीं...


असद : उस पर हम आगे क्या कह सकते हैं...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : जो तुमने इमरान की बात है... इमरान कहां रहता है कहां नहीं रहता है, ये तुम्हारे जानकारी में रहता है..


असद : इमरान कहां रहता और कहां नहीं रहता है ये हम भी जानता हूं...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : सुन तो हमारी बात... बचपन से मेरे दोस्त भी रहते हैं... कभी कभार फोन फाटा आता रहता है. हम इनकार तो किसी को नहीं कर सकते हैं.


असद : वहीं बात तो है...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : हमारे यहां कई लोग काम करते हैं, कौन किसने मुलाकात करता है ये तो पता नहीं चल पाता है. आज भी आए थे, किसी से मुलाकात करते चले गए


असद : चलिये हम बात कर लेते हैं, हमारा नंबर सेफ कर लीजिए, फोन करूं तो उठा लीजिएगा..

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : ठीक है...



दूसरी ऑडियो रिकॉर्डिंग


असद : हेलो

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : हेलो


असद : असद बोल रहे हैं

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : हां, आपका अभी नंबर मिला...


असद : हम आपके फ्लैट पर आए थे, इतनी देर से खड़े थे, आपने दरवाजा तक नहीं खोला...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : हम यहां नहीं हैं...


असद : अच्छा

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : हम एक डेढ़ घंटे से निकले हैं... कब आए थे तुम


असद : अभी आए थे, इमरान साहब आपके यहां बैठे हैं...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : नहीं... नहीं.... इमरान आए थे और उनका कोई मसला था. उसी सिलसिले में उनकी गाड़ी खड़ी और वो भी किसी के साथ कहीं गए हैं.


असद : तो हम आए जाए आपके पास मुलाकात हो जाएगी...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : अभी नहीं... अभी लेट हो जाऊंगा, मैं वकील के पास हूं कोई मसला है, लेट हो जाऊंगा


असद : तो कब आ जाए...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : अभी हम खाली हो कर फोन करते हैं... कहां हो तुम अभी... 


असद : हम वापस आ रहे हैं... हम आपके घर के बहुत पास हूं.

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : आज मैं एक डेढ़ घंटे में खाली हो जाऊंगा तो फोन करूंगा... नहीं तो कल रखते हैं... कल संडे है...


असद : मैं ये कह रहा था... इमरान साहब अंदर नहीं हैं, लेकिन उनकी गाड़ी खड़ी है.

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : नहीं... नहीं... इमरान अंदर नहीं है...


असद : अच्छा, इमरान रोज आते हैं, चार-चार घंटा बैठते हैं...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : आज उनकी गाड़ी खड़ी है और वो किसी काम आए थे... और किसी के साथ निकल गए. 


असद : अच्छा, हम गलत गाड़ी देख लिया होगा... रोज देखता हूं कि रोज 12.30, 1 बजे तक गाड़ी खड़ी रहती है... 

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : नहीं ऐसा नहीं है, किसी और मिलने आते होंगे, आज इमरान से मुलाकात हुई थी.


असद : वो आपसे ही मिलने आते होंगे और किसी से मिलने नहीं आते होंगे...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : नहीं, मुझसे मिलने क्या? कोई काम हो तो फोन पर बातचीत होती. हम दोनों बचपन के दोस्त हैं....


असद : मगर गेट नहीं खोला गया... ये ठीक नहीं है मुस्लिम साहब.

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : हम तो हैं ही नहीं, हम होते तो आपसे मुलाकात करते में क्या दिक्कत थी. 


असद : वहीं तो बात, आपसे मुलाकात में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इमरान खान हैं तो आप गेट नहीं खोले

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : नहीं.. नहीं... इमरान खान नहीं है... कोई बात माना करो मैं कह रहा हूं तो


असद : हम भी कुछ कह रहे मुस्लिम साहब...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : अगर इमरान हो तो मैं क्या बताऊं, चले जाओ देख लो, घर खाली है या नहीं.... हमारे घर पर कोई नहीं आता है...


असद : चौथे फ्लोर पर आपका फ्लैट है... ब्लैक-ब्लैक दरवाजा है

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : हां... हां... उसी पर रहते हैं...


असद : चलिये ठीक है... मैं फोन करूंगा.. नंबर सेफ कर लीजिए...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : इमरान घर पर रहते हैं इलाहाबाद


असद : हां, आप नंबर सेफ कर लीजिए... फोन उठा लीजिएगा...

बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम : हां... हां... चलिये ठीक है...


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