तिरंगे के नाम पर भी पैसा खाने से नहीं चूक रही है वर्तमान सरकार, रेलवे कर्मचारियों के वेतन से वसूली जायेगी झंडे की कीमत, पढ़िए विस्तार से

कवरेज इंडिया न्यूज़ डेस्क प्रयागराज

प्रयागराज। सरकार आजादी का अमृत महोत्सव नाम से हर घर तिरंगा अभियान चला रही है, यही नहीं करोड़ों रुपए खर्च करके इस अभियान का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है या यूं कहें की आगामी लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि हर घर तिरंगा के नाम से तैयार की जा रही है। लेकिन प्रयागराज से आ रही है खबर आपको चौंकने पर मजबूर कर देगी। एक तरफ आम जनता महंगाई के बोझ तले दबे जा रही है तो वहीं सरकार तानाशाही करने से बाज नहीं आ रही। 

सरकार के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह अब हर घर तिरंगा और आजादी के अमृत महोत्सव जैसे नामों के सहारे भी आम जनता से लूट मचाने में पीछे नहीं हट रही। बता दें कि हर घर झंडा अभियान के तहत सभी रेलकर्मियों को रेलवे की ओर से दिए जाने वाले तिरंगे की कीमत उनके वेतन से वसूली जाएगी। प्रति झंडा 38 रुपये की कटौती रेलकर्मी के वेतन से होगी। हालांकि यह आदेश यूनियन नेताओं को पसंद नहीं आ रहा है और उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया है।

आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में हर घर तिरंगा योजना का क्रियान्वयन 13 से 15 अगस्त तक होगा। इस दौरान हर रेलकर्मी अपने घरों पर तिरंगा फहराएंगे। यह तिरंगा उन्हें रेलवे की ओर से दिया जाएगा। जिसकी एवज में प्रति झंडा 38 रुपये कीमत तय की गई है। रेलकर्मियों को नगद पैसे देकर झंडा नहीं लेना होगा, बल्कि उनके वेतन से इसका मूल्य काटा लिया जाएगा। झंडा एक निजी एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।

तिरंगे की खरीदारी स्टाफ बेनीफिट फंड (कर्मचारी लाभ कोष) से की जानी है और बाद में रेलकर्मियों के खाते से काटे गए पैसे कर्मचारी लाभ कोष में ही भेजा जाना है।

नार्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ के मंडल मंत्री चंदन सिंह ने कहा कि रेलकर्मी खुद राष्ट्रभक्त हैं और अपने पैसे से स्वयं तिरंगा खरीदेंगे। उन पर यह नियम न थोपा जाए। जोनल महामंत्री आरपी सिंह ने कहा कि स्टाफ बेनीफिट फंड से झंडा खरीदा जाए लेकिन, वेतन से पैसे ना काट जाए।

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