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Saturday, March 14

अटेवा ने MLC स्नातक-शिक्षक चुनाव के लिए ठोकी ताल


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क लखनऊ। 
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की स्नातक व शिक्षक क्षेत्र की 11 सीटों पर अप्रैल में होने वाले चुनाव के लिए तैयारी तेज हो गई है। विधान परिषद में छह सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की और पांच सीटें स्नातक निर्वाचन की हैं। इन 11 सीटों पर मौजूदा विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल इस साल छह मई को खत्म हो रहा है। इससे पहले इन सीटों का चुनाव होना है। अंतिम फेस में पहुँचते ही चुनाव और भी ज्यादा दिलचस्प हो गया है। पुरानी पेंशन की लड़ाई लड़ रहे संगठन  ऑल टीचर एम्प्लॉय वेलफेयर एसोसिएशन ने भी विधान परिषद् के स्नातक और शिक्षक खंड निर्वाचन क्षेत्र से अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। आपको बता दें कि अटेवा का दावा है कि उसके साथ प्रदेशभर में 13 लाख सरकारी एम्प्लॉय जुड़े हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक हलके में तहलका मचना स्वाभाविक है। 

अटेवा के प्रदेश महामंत्री डॉ. निराजपति त्रिपाठी ने कहा कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष हो हमारी बातों को अनसुना कर रही है। इसीलिए मजबूरन संगठन को एमएलसी के चुनावी मैदान में उतरना पड़ रहा है। इस बार नौजवान बताएगा की हमारी ताकत कितनी है। उन्होंने कहा कि पेंशन हमारा हक़ है और इसे पाने के लिए अब हम सड़क से लेकर सदन तक की लड़ाई लड़ेंगे। आपको बता दें कि आगामी चुनाव के मद्देनजर अटेवा ने संगठन से पांच उम्मीदवारों की घोषणा शनिवार देर शाम की है जबकि दो प्रत्याशियों को संगठन ने बाहर से समर्थन दिया है। वाराणसी स्नातक क्षेत्र से चंद्र प्रकाश गुप्ता, इलाहाबाद-झाँसी स्नातक क्षेत्र से डॉ. हरि प्रकाश यादव, आगरा स्नातक क्षेत्र से डॉ. नन्दलाल निर्भय, जबकि मेरठ स्नातक क्षेत्र से अर्चना शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीँ दूसरी लखनऊ शिक्षक क्षेत्र से डॉ. मनोज चुनाव पांडेय, गोरखपुर-फैज़ाबाद शिक्षक क्षेत्र से राजीव यादव एवं आगरा शिक्षक क्षेत्र से धर्म सिंह भदौरिया को मैदान में उतारा है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि अटेवा के चुनावी मैदान में उतरते ही अन्य राजनीतिक दलों में खलबली मच गई है। संगठन के साथ जुड़े 13 लाख की संख्या में सरकारी एम्प्लॉय चुनाव को किसी भी तरफ मोड़ने का माद्दा रखते हैं। सत्ता पक्ष हो या फिर विपक्ष सबकी नींदें उड़ी हुईं हैं अब देखना होगा कि क्या इतने कम समय में अटेवा चुनावी नतीजों को अपनी और मोड़ पाता है या नहीं या सिर्फ वह एक वोट कटवा बनकर रह जाता है।

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