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Wednesday, March 18

हनुमान जी के पंचमुखी रूप का व्याख्यान


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
हनुमान की वीरता को उनके ब्रह्मचर्य से जोड़ा जाता है। किन्तु एक रोचक प्रसंग यह है कि आनन्द रामायण में उनके पुत्र मकरध्वज का उल्लेख मिलता है। मेघनाद की मृत्यु के पश्चात रावण ने अपने सौतेले भाई अहिरावण को सहायता के लिए बुलाया। अहिरावण पाताल लोक का स्वामी था। उसने योजना बनाई कि वह राम और लक्ष्मण को चुराकर पाताल ले जाएगा और उन्हें चंडी देवी की बलि चढ़ा देगा। हनुमान को यह बात ज्ञात हो गई। वे उनके द्वार पर खड़े हो गए जिससे अहिरावण भीतर न जा सके। तब अहिरावण विभीषण के भेष में आया और हनुमान ने उसे अन्दर जाने दिया। अहिरावण सोते हुए राम और लक्ष्मण को उठाकर पाताल ले गया। यह ज्ञात होते ही हनुमान भी वहाँ पहुँच गए।

द्वार पर हनुमान को मकरध्वज नामक द्वारपाल मिला जो आधा बन्दर और आधा मगरमच्छ था। उसने हनुमान से कहा कि यद्यपि वह उसके पिता हैं, फिर भी जब तक वह उसे पराजित नहीं कर देते, वह उन्हें भीतर नहीं जाने देगा। हनुमान कहते कि हैं उनका तो कोई पुत्र नहीं। तब मकरध्वज उन्हें अपने जन्म की कथा सुनाता है। लंकादहन के पश्चात जब हनुमान अपनी पूँछ की आग बुझाने के लिए समुद्र में कूदे तो उनके पसीने की एक बूँद एक बलशाली विशालकाय मगर के मुँह में जा गिरी। उसी से मकरध्वज पैदा हुआ। अहिरावण उसका विशाल आकार और असाधारण रूप देखकर उसे अपने साथ पाताल ले गया।

हनुमान ने मकरध्वज को परास्त किया और अन्दर जा पहुँचे। किन्तु अहिरावण को परास्त करना टेढ़ी खीर था। हनुमान को ज्ञात हुआ कि अहिरावण  तभी मारा जा सकता है जब पाँच दिशाओं में विशेष स्थानों पर जलती ज्योतियों को एक साथ उसी पल में बुझा दिया जाए। हनुमान ने पंचमुखी रूप धारण कर एक साथ पाँचों मुखों से फूँक मारकर यह कार्य सम्पन्न किया। तब वह अहिरावण को मार, राम और लक्ष्मण को लेकर वापिस आए।

हनुमान जी के ये पाँच मुख हैं:
· पूर्व दिशा में कपि या  हनुमान, जो पापनाशक और विमल बुद्धि के दाता हैं।
· दक्षिण दिशा में नरसिंह, जो शत्रुविनाशक और विजयदायक हैं।
· पश्चिम दिशा में गरुड़, जो विष और अन्य न दिखने वाले, समझ में न आने वाले अनिष्टों से रक्षा करते हैं।
· उत्तर दिशा में वराह, जो अष्ट निधियाँ देने वाले, और ग्रहदशा दूर करने वाले है।
· ऊर्ध्व दिशा में हयग्रीव, जो विजय, ज्ञान, सन्तान, और सुखमय गृहस्थ जीवन देने  वाले हैं।

इस प्रकार हनुमान पाँच दिशाओं से अपने भक्तों को  भाँति भाँति की सुरक्षा प्रदान करते हैं । पंचमुखी हनुमान को ग्यारहवें रुद्र का अवतार माना जाता है।

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