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Thursday, January 9

क्यों ना देखे 'छपाक', तार्किक जवाब दें बंद करें बेमतलब की बातें...


अनूप उपाध्याय, कवरेज इण्डिया। 
क्या आपने कभी सोचा है 4 बेमतलब के लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से एक मनगढ़ंत पोस्ट डाली और हम सब ने कॉपी पेस्ट कर शुरू कर दिया..... इसी को कहते हैं भेड़िया धसान मुख्य मुद्दों से दूर होकर बेमतलब की बातें शुरू हो गई..... छपाक उस बहादुर लड़की लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी है जिसके ऊपर एसिड फेंक दिया जाता है पूरा चेहरा बिगड़ जाता है फिर भी हिम्मत को नहाते हुए पूरे जोश और जज्बे के साथ तमाम ऐसी बच्चियों के लिए मिसाल बन जाती है जो या तो तेजाब से जला दी जाती हैं या उनके साथ दुराचार किया जाता है और खामोश होकर या तो जिंदगी को खत्म कर लेती है या समाज से दूर कहीं अंधेरे में अपना जीवन यापन करती हैं और अपराधी बहादुरी के साथ खुलेआम बाजार व चौराहों पर घूमता नजर आता है......

उनके खिलाफ एक नए जीवन की शुरुआत कर एक मिसाल बनने वाली बहादुर लड़की लक्ष्मी अग्रवाल पर आधारित एक प्रेरक कहानी पर बनी फिल्म का इतना विरोध नहीं होना चाहिए बल्कि समर्थन मिलना चाहिए यदि वाकई आप समाज को सुधारना चाहते हो व इस प्रकार के अपराध करने वालों के गाल पर जोरदार तमाचा देना चाहते हो तो या फिल्म एक प्रेरक फिल्म है इसे अवश्य देखें.....

हां एक बात और कौन कहता है कि तेजाब फेंकने वाले मुस्लिम नाम की जगह कोई हिंदू नाम रख दिया गया है क्या आपके पास इस बात का कोई प्रमाण है? क्या आपने फिल्म देखी है ?यदि नहीं तो बिना जाने समझे इस प्रकार कॉपी पेस्ट करना शायद मेरी समझ से अनुचित है हर बात में बस हिंदू मुस्लिम क्या मजाक बना रखा है ..... शायद यह ताकत व समय देश के विकास में, अपने काम में लगाते हुए हम सदुपयोग करें तो शायद तस्वीर बेहतर बन जाए

आप सब से अनुरोध है कि इस महत्वपूर्ण विषय पर मंथन करते हुए विचार करिएगा व उचित टिप्पणी करिएगा मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं अपितु आपको बस इतना याद दिलाना कि कहीं वाकई कोई हमें भीड़ का हिस्सा तो नहीं बनाने की कोशिश कर रहा है। 

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