मोदी ने पाकिस्तान के लिए कहा- तीन-तीन जंग हार चुके पड़ोसी देश को हराने में हमें 10-12 दिन भी नहीं लगेंगे - COVERAGE INDIA

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Tuesday, January 28

मोदी ने पाकिस्तान के लिए कहा- तीन-तीन जंग हार चुके पड़ोसी देश को हराने में हमें 10-12 दिन भी नहीं लगेंगे


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राजधानी में एनसीसी कैडेट्स की रैली को संबोधित किया। मोदी ने पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि आज यहां जिन साथियों को पुरस्कार मिले हैं उनको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। यूथ एक्सेंट प्रोग्राम के तहत हमारे पड़ोसी देशों से अनेक कैडेट यहां मौजूद हैं, मैं उनका अभिवादन करता हूं। आज विश्व में हमारे देश की पहचान, युवा देश के रूप में है। देश के 65 फीसदी से ज्यादा लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। देश युवा है, इसका हमें गर्व है, लेकिन देश की सोच युवा हो, ये हमारा दायित्व होना चाहिए।

जो लोग काम चलाने वाली प्रवृत्ति के होते हैं उनके लिए कल कभी नहीं आता। इस स्थिति को मेरे आज का युवा भारत, मेरे भारत का युवा, स्वीकारने के लिए तैयार नहीं है। वो छटपटा रहा है कि स्वतंत्रता के इतने साल हो गए, चीजें कब तक ऐसे ही चलती रहेंगी? वो देश बदलना चाहता है, स्थितियां बदलना चाहता है। इसलिए उसने तय किया है कि अब टाला नहीं जाएगा, अब टकराया जाएगा, निपटा जाएगा। यही है युवा सोच, यही है युवा मन, यही है युवा भारत। कश्मीर भारत की मुकुटमणि है। 70 साल बाद वहां से आर्टिकल 370 को हटाया गया। हम जानते हैं कि हमारा पड़ोसी देश हमसे तीन-तीन युद्ध हार चुका है। हमारी सेनाओं को उसे धूल चटाने में हफ्ते-दस दिन से ज्यादा समय नहीं लगता। आज युवा सोच है।
युवा मन के साथ देश आगे बढ़ रहा है और इसलिए वह सर्जिकल स्ट्राइक करता है, एयर स्ट्राइक करता है और आतंक के सरपरस्तों को उनके घर में जाकर सबक सिखाता है। इसका परिणाम आप भी देख रहे हैं।

स्वतंत्रता के बाद से स्वतंत्र भारत ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों से ये वादा किया था कि अगर उनको जरूरत होगी तो वो भारत आ सकते हैं। यही इच्छा गांधीजी की थी और यही 1950 में नेहरू-लियाकत समझौते की भी थी। ऐसे लोगों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को रोकने के लिए भारत के पुराने वादे को पूरा करने के लिए आज जब हमारी सरकार सीएए लेकर आई है। कुछ राजनीतिक दल अपने वोटबैंक पर कब्जा करने की स्पर्धा में लगे हैं, आखिर किसके हितों के लिए काम कर रहे हैं ये लोग।

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