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Wednesday, December 11

गणेश कैसे कहलाए एकदंत, पढिए ये रोचक जानकारी


कवरेज इण्डिया धर्म कर्म डेस्क। 
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश की पूजा का दिन बुधवार को माना गया है। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने गणेश को जन्म नहीं दिया बल्कि उनके शरीर की रचना की है। गणों के स्वामी होने की वजह से इन्हें गणपति के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेशजी हैं। हाथी जैसा सिर होने के कारण उन्हें गजानन भी कहते हैं। गणेश जी का नाम हिन्दू शास्त्रों के अनुसार किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले लिया जाता है इसलिए इन्हें प्रथमपूज्य भी कहते हैं। गणेश की उपासना करने वाला सम्प्रदाय गाणपतेय कहलाते हैं।
गणेशजी के अनेक नाम हैं लेकिन ये 12 नाम प्रमुख हैं- सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन। गणेशजी का नाम एकदंत पड़ने के पीछे ऐसी मान्यता है कि महाभारत की रचना के दौरान महर्षि वेदव्यास लगातार बोल रहे थे और गणेश जी उसे लिख रहे थे। दोनों के बीच यह शर्त थी कि दोनों में से कोई रुकेगा नहीं। कथा लिखने के दौरान ही गणेश जी की कलम टूट गई और महर्षि वेदव्यास बोलते रहे, तो गणेशजी ने अपने एक दांत तोड़कर उसे स्याही में डुबोकर लिखने लगे। इस वजह से उनका नाम एकदंत पड़ गया।

एक अन्य कथा के अनुसार, गणेश के बड़े भाई कार्तिकेय काफी शांत स्वभाव के थे और गणेश चंचल स्वभाव के थे। दोनों भाइयों में अक्सर लड़ाई होती रहती थी। एक बार कार्तिकेय ने क्रोध में आकर गणेश जी की पिटाई कर दी और उनका दांत टूट गया इसी वजह से भी गणेशजी का नाम एकदंत पड़ गया।

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