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Saturday, December 14

जो कहते हैं पत्रकार दलाल हैं वो जरा पढ़ें इस खबर को


रंजीत यादव, वरिष्ठ पत्रकार। 
पत्रकार कभी दलाल नही होता क्यों कि पत्रकार आपके बीच का सामान्य व्यक्ति होता है उसके पास न चलने को अच्छी बाइक होती है न रहने को  अच्छा घर होता है पत्नी और बालक के बीमार होने पर जुगाड़ से दवाई करवाने को विवश होता है पत्रकार -समझे

पत्रकार दलाल पत्रकार दलाल अरे दिमाग मे गाय गोबर के अलावा भी कुछ हो तब न समझ मे आये की पत्रकार क्या होता है -tv पर आने वाले को आप पत्रकार समझते है तो आपकी अज्ञानता है उसमें हम क्या करें वो पत्रकार नही बल्कि प्लानर (कारपोरेट घराने )का पेड इम्प्लाइज होता है -उसे लिखी स्क्रिप्ट मिलती है -लड़ाने उलझाने का काम कोई और देता है जिसमे आपके अपने लोग जिम्मेदार होते हैं जिन शातिरों को आप शिखर तक पहुंचाते हैं अब आप न समझें तो उसमे पत्रकार का क्या दोष है बस अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए दूसरों पर थोपते हैं आपको पता है जिन tv वालो को आप पत्रकार मानते हैं  उनकी सैलरी क्या है आपको नही पता है तो जान लीजिए उन्हें 2लाख से लेकर 5 लाख तक दिया जाता है? साथ मे चलने के लिए वाहन घुमाने के लिए असलहे वाले लोग साथ मे कहीं आने जाने पर रहने खाने सहित अन्य मदो में धन मिलता है पर आप गालियां पत्रकारों को देंगे ? अपनी समझदारी बढ़ाएं-
क्या जानते हैं पत्रकारों के बारे में आप ?
-क्या आप जानते हैं आपके एरिये के पत्रकार को सैलरी नही मिलती ?
क्या आप जानते हैं सरकार मेडिकल सुबिधा -यात्रा सुबिधा -आवास सुविधा -पेंशन सुबिधा नही देती -

 आप से सवाल है मेरा -

-आप पत्रकारों की क्या मदद करते है ?
-सच दिखाने पर जेल जाता है औऱ आप मिलने तक नही जाते क्यों  ?
-आपको सच दिखाने के लिए पत्रकार लाठी डंडे खाता है बाद में पत्रकार की मरहम पट्टी क्यों नही करवाते ?
-पत्रकार का भूखमरी से परिवार मरता है क्यों नही खड़े होते आप ?
-कितने बार पत्रकारों की सैलरी के लिए आप रोड पर आकर विरोध दर्ज करवाते ?
-सच की उम्मीद और ठेका सिर्फ पत्रकार पर ही क्यों ?-
-आखिर सच बोलने -सच्चाई के साथ आप क्यों नही खड़े होते ?

और हां अगर सव सच मुफ्त में ही चाहते हैं तो अपने खर्च से कटौती कर अपने आसपास के पत्रकारों की मदद क्यों नही करते ?
पत्रकारों के अधिकार के लिए क्यों नही लड़ते ?

कुल मिला कर आप दिमाग मे रख लें मित्र -सच खुद बोलें-ईमानदार खुद बने -मददगार खुद बने
जिस दिन आपने अपनी भूमिका अदा कर दी उस दिन आपको ये नही कहना पड़ेगा पत्रकार गुमराह कर रहे हैं -

चलते चलते मेरी तरफ से उनके लिए एक विशेष तौर पर संदेश जो पत्रकार को दलाल कहते हैं झूँठा कहते हैं तो जान लीजिए
जिस बालक को बचपन से पालते पोषते हैं आप बचपन से - सच का पाठ पढ़ाते है वही समाज का आईना बनता है
अब खुद से पूछिए आप कितनी ईमानदारी से उसे ये शिक्षा दी  हैं। 

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