राम चरित मानस में वर्णित ये छोटी सी कहानी हमे एक उम्दा प्रेरणा देती है.... - COVERAGE INDIA

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Friday, October 4

राम चरित मानस में वर्णित ये छोटी सी कहानी हमे एक उम्दा प्रेरणा देती है....


कवरेज इण्डिया धर्म कर्म डेस्क। 
प्रभु श्री राम के लंका विजय पर जाते समय राम सेतु निर्माण के लिए नल-नील, रीछ-वानरों की सेना पत्थरों को जुटाने की तैयारी कर रही थी । इन्हीं में से थी एक गिलहरी , उसने सोंचा मैं बहुत छोटी जरूर हुँ... साधन विहीन भी.. पर इससे क्या... मैं आखिर में कुछ तो हुँ ही... औऱ वह जो कुछ भी है...उसे लेकर लोक मंगल के लिए आत्म बलिदान करने का अधिकार हर किसी को है। सो मैं ही क्यों सकचाऊँ । ईश्वर ने जितना दिया है । उसी को लेकर उनके आगे आत्म समर्पण क्यों ना करूँ...?

गिलहरी की इसी निष्ठा का अभिनंदन करने के लिए प्रभु श्रीराम ने उसके पास जाकर अपने श्यामल हाँथों की उंगलियाँ उसकी पीठ पर फेर कर एक ऐसी याद पूरी गिलहरी जाति को दे दी, जो हर छोटे समझे जाने वाले , साधन-विहीन की हिम्मत सदैव बढ़ाती रहेगी। कहते हैं कि तभी श्रीराम द्वारा फेरी गईं उंगलियों की रेखायें आज भी उस गिलहरी के वंशजो की पीठ पर एक शानदार पदक के रूप में अंकित हैं। प्रभु के चरणों मे साधन-विहीन शुद्व हृदय से जाना ही जीवन को कृतार्थ करता है। 

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