विजय दशमी में जानें 'विजय' के दस सूत्र वशिष्ठ जी महराज से - COVERAGE INDIA

Breaking

Friday, October 4

विजय दशमी में जानें 'विजय' के दस सूत्र वशिष्ठ जी महराज से

वशिष्ठ जी महाराज

कवरेज इण्डिया धर्म कर्म डेस्क। 
मानव जन्म से ही जिज्ञासु एवम् सत्य का साधक है,किन्तु सही वातावरण के आभाव में वह अपने सही राह से भटक जाता है। हर कोई अपने जीवन में विजय या सफलता प्राप्त करना चाहता है,लेकिन क्या हम सफलता का सही अर्थ जानते है?यदि ईमानदारी से पूछा जाय तो आज लोग ,धन दौलत सोहरत ,की प्राप्ति को ही सफलता मान रखे है,जबकि ऐसा बिलकुल नही है,आप देखिये बड़े बड़े धन पशु और अधिक धन एवम् सोहरत के पीछे भाग रहे है क्यों?

एक अनिश्चित दौड़ में सामिल है क्यों? क्योंकि उन्हें असली सफलता की परिभाषा ही नहीं पता।
आइये जानते है असली सफलता क्या है?
आपको क्लिस्ट संस्कृत के श्लोको में उलझाने के बजाय सरलता से बताते है।

सफलता का अर्थ है 'सुफलता'
यानी सुंदर फल की प्राप्ति ,सुंदर क्या है?जो सही हो वास्तव में वही सुंदर है,इसलिए-
'सत्यम् शिवम् सुंदरम' कहा गया/
सत्य क्या है,?जो जैसा है उसे वैसा ही जानना,मानना, पहचानना,सत्य है। अपने मन,वृत्ति,चित्त,बुद्धि, आत्मा एवम् परमात्मा को जानकर सम्पूर्ण सृस्टि में सद्व्यवहार करना ही वास्तव में सफलता है। किन्तु सांसारिक दृस्टि से लोग से लोग स्वास्थ्य एवम् धन यश की प्राप्ति को ही सफलता मानते है,उनके लिए कुछ सूत्र दे रहे है,ध्यान पूर्वक पढ़ें, और प्रयोग करें।

1-कर्मकांड के द्वारा सफलता
आप इस विजय दसमी से अपने घर में प्रतिदिन श्री सूक्त का पाठ करें। श्री सम्पूर्ण यन्त्र के सामने गाय के घी का दीपक जलाये।
ॐ श्रीं श्रीयै नमः का 108 बार जप करें।
यह प्रयोग श्रद्धा भाव से करें, यह अनुभूत प्रयोग है,अवश्य लाभ होगा।

2-राशि के द्वारा विजय
आप इस विजय दशमी को अपनी राशि का यंत्र,ताम्र पत्र पर बना हुआ ले आये। उसे गंगाजल से धोकर धुप दीप चन्दन फूल अक्षत एवम् पंचमृत से पूजा करके,अपनी राशि का मन्त्र 108 बार बोलकर अपने जेब में रखें।
यह 1वर्ष तक आपकी उन्नति एवम् लाभ में सहायक होगा साथ ही रक्षा कार्य भी करेगा।

3-यंत्र से विजय
आप इस विजय दशमी में बाजार से नारायण विशा यंत्र
लेकर आये और उसे विधिवत प्राणप्रतिष्ठा करवाकर घर के ईशानकोण में मंदिर में रखें।
तथा प्रतिदिन #ॐ नमो नारायणाय#का 108 बार जप करें। यह सर्वश्रेष्ठ विशा यंत्र है,कहा गया है।

जो सहाय विशा ,तो क्या करे जगदीशा।
अर्थात जिसकी रक्षा वीसा करे उसका जगदीश भी क्या कर लेंगे?

4-रत्नों द्वारा विजय
आपको सफलता में देर विलम्ब या रुकावट हो रही है-तो आप इस विजय दसमी या अन्य दिन अपने कुंडली की जांच करवाकर,राशि रत्न,व भाग्य रत्न लेकर प्रणप्रतिष्ठा करवाकर धारण करें।
ध्यान रहे रत्न सुद्ध असली और वेदाग होगा तभी उसका सही फल मिलेगा।

5-अंको द्वारा सफलता
आप अपना जन्मांक,मूलांक,भाग्यांक एवम् नाम का अंक जानकार उसे अंक ज्योतिषी से परामर्ष करके अनुकूल परिवर्तन करके ,अपने अंक के अनुकूल रंग,रत्न,एवम् जड़ी बूटी धारण करके ,अपना जीवन आसान कर सकते है।

6-कवच द्वारा सफलता
आप अपने जीवन से विघ्नों को दूर कर सफलता प्राप्ति हेतु इस विजय दशमी से कवच का पाठ एवम् कवच धारण कर सकते है।
जैसे सूर्य गृह के निवारण व् इससे सम्बन्धी सफलता हेतु सूर्य कवच,शनि मंगल आदि स्तोत्र एवम् कवच का पाठ ,तथा कवच धारण करें। सर्व सफलता हेतु सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का प्रतिदिन 21 पाठ करे ।
21 दिन तक अभूतपूर्व लाभ होगा।

7-यज्ञ अनुष्ठान द्वारा विजय
आप अपने जीवन के घोर कष्टो को दूर करके जबरदस्त सफलता हेतु यज्ञो का सहारा ले सकते है।
जैसे किसी प्रकार की बिमारी एवम् असफलता अल्प मृत्यु,अकाल मृत्यु भय आदि दूर करने हेतु ,महामृत्युंजय  एवम।रुद्राभिषेक।सभी प्रकार के शत्रु बाधा दूर करने मुकदमा विजय हेतु ,बंगलामुखी अनुष्ठान,सभी प्रकार की सफलता एवम् धन वैभव लक्ष्मी हेतु ,लक्ष्मी नारायण यज्ञ।
सभी प्रकार के प्रेत एवम् शत्रु बाधा तांत्रिक बाधा हेतु ,महाविद्या प्रयोग किया जा सकता है।

8-वनस्पति द्वारा
हा वनष्प्तियो द्वारा भी आपको सफलता के दर्शन हो सकते है।ब्रह्माण्ड में 9 गृह और 27 नक्षत्र है,उन सभी के प्रतिनिधि रूप वृक्ष इस पृथ्वी पर उपस्थित है,जैसे ,सूर्य के लिये आक(मंदार)चंद्र हेतु पलाश,मंगल हेतु खैर,बुध हेतु अपामार्ग,गुरु हेतु पीपल,शनि हेतु शमी राहु केतु हेतु कुश एवम् दूर्वा।ऐसे ही 27 नक्षत्रो की जड़िया होती है,जिनका प्रयोग अपनी राशि एवम् नक्षत्रो अनुसार आप कर सकते है।
आप गृह नक्षत्र वाटिका लगाकर पर्यावरण की भी रक्षा कर सकते है,और अपनी भी।

9-कर्म एवम् मेहनत
हां इस विजय दशमी में आप यह भी संकल्प ले की हम अपने कर्म व मेहनत से पीछे नही हटेंगे।सारी सफलता आपके प्रयास के पीछे चलती है,अतः उपरोक्त सभी प्रयास आप अपने कर्म करते हुए करेंगे तभी सफल होंगे भाग्य भरोसे बैठने मात्र से नहीं।

10- ज्ञान व समझदारी
आप ऊपर के सभी सूत्र अपना कर भी यदि ज्ञान एवम् समझदारी से कार्य नहीं करते है।
हर कार्य सोच समझकर नहीं करते तो सफलता मिलना दुर्लभ है।जैसे ऊसर भूमि में बीज नही उगता वैसे ही अज्ञानियों के पास सफलता नही टिकती।आपको विजय दशमी की ढेर सारी शुभ कामनाये।

वशिष्ठ जी महराज
guruji09322320055@gmail.com

Our Video

MAIN MENU