लाखों हिन्दुओं को ख़त्म कर देने वाले मिशनरी से लड़ी लड़ाई, 20 सालों से जेल में बंद है ये हिन्दू ! - COVERAGE INDIA

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Tuesday, September 10

लाखों हिन्दुओं को ख़त्म कर देने वाले मिशनरी से लड़ी लड़ाई, 20 सालों से जेल में बंद है ये हिन्दू !


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
दारा सिंह उर्फ़ रविंदर पाल जी ग्राम ककोर , फफूंद , जिला औरैया के निवासी हैं ।। दारा सिंह के ऊपर 2 धर्म परिवर्तकों ग्राहम स्टेन्स और फादर अरुल दास के साथ 1 गौ हत्यारे शेख रहमान की हत्या का अभियोग चला था जिसमे उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी ।

दारा सिंह के प्रत्येक प्रकरण की जांच केंद्र व् राज्य सरकार में मौजूद तात्कालिक कांग्रेस सरकार ने की थी जिसका हिन्दू विरोधी रवैया सर्वविदित है….. साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के विषय में , डी सी बंजारा जी के विषय में काँग्रेस सरकार की घोर हिन्दू विरोधी मानसिकता का प्रमाण संसार देख चुका है ,, अतः श्री दारा सिंह जी के विषय में कांग्रेस अधीनस्थ जाँच एजेंसियों ने निष्पक्षता दिखाई रही होगी ये असंभव है ।।। हिन्दू संगठनों की माँग है की हम इस समूचे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच का आवेदन करते हैं जिसमें लाखों हिंदुओं के धर्म परिवर्तक ग्राहम स्टेन्स के साथ गौ हत्यारे शेख रहमान के काले कारनामों का भी खुलासा हो ।

हम ये मानते हैं कि धर्मपरिवर्तको को खुली छूट और गौ माता की सार्वजनिक हत्या ध्वस्त क़ानून व्यवस्था का ही एक रूप है और ध्वस्त क़ानून को अक्सर पीड़ित और शोषित जनता अपने हाथ में मजबूरी में लेती है ।।। अतः धर्मपरिवर्तन और गौ हत्या के विरुद्ध दारा सिंह के प्रतिकार की सजा इतनी भी नही होनी चाहिए जितनी उनको दी गयी है ।।।18 वर्ष अनवरत जेल की सजा राष्ट्रद्रोहियों के लिए होती है , राष्ट्र और धर्म भक्तों के लिए नहीं ।

विदित हो कि तात्कालिक जाँच के हर भाग में ग्राहम स्टेन्स और शेख रहमान की हत्या भीड़ द्वारा करना लिखा गया है ,, फिर भीड़ के सम्पूर्ण आक्रोश का दंड एकमात्र व्यक्ति पर ही क्यों उतारा गया ???? क्या काँग्रेस पार्टी के किसी भी कार्यकर्ता के किसी भी अपराध का दंड सोनिया जी या राहुल जी को दिया जाता है ??? विगत 18 साल में उड़ीसा की सरकार ने जेल में बंद आजीवन कारावास की सजा पाये सैकड़ों बंदियों को मात्र 14 साल या उस से पहले छोड़ा है जिसमे हमारे जवानों के नरसंहार के दोषी अनेक दुर्दांत नक्सली भी शामिल हैं । फिर दारा सिंह के ही विषय में इस प्रकार का दोगला व्यवहार क्यों ?

स्वयं माननीय सुप्रीम कोर्ट दारा सिंह के फैसले में ये आदेश दे चुका है कि दारा सिंह का अपराध रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में नहीं आता और और उनसे ये कार्य अपने धर्म के प्रति अथाह श्रद्धा के फलस्वरूप हुआ । फिर आखिर उस समय दारा सिंह के प्रति वो कौन से सरकारी द्वेष भावना थी कि उनकी माता जी और उनके पिता जी की असामयिक मृत्यु तक जैसी भीषणतम आपदाओं में उन्हें घंटे भर का भी पैरोल नहीं दिया गया । क्या अपने माता पिता के अंतिम संस्कार में मुखाग्नि देने से रोकना मानवाधिकार का उलन्घन नहीं था ? क्या ये सरकारी मंशा द्वेष भावना से प्रेरित नहीं थी ?

दारा सिंह जी भारत सनातन के सर्वोच्च संस्कारी और निडर संगठन बजरंग दल के उड़ीसा क्षेत्र के वरिष्ठ पदाधिकारी थे , जिस संगठन में राष्ट्र और धर्म पर निस्वार्थ मर मिटना सिखाया जाता है ।। उन्ही संस्कारो का परिणाम है कि 18 साल से जेल में बिना किसी पीड़ा के आत्मसंतोष से समय बिताया उन्होंने। अतः दारा सिंह जी के झूठे और भ्रामक काँग्रेसी प्रचार का पर्दाफ़ाश होना अतिआवश्यक है ।। दारा सिंह की स्वर्गीय माँ की अस्थियां अभी भी उनके खेतों में अपने पुत्र द्वारा विसर्जन की प्रतीक्षा में गड़ी हैं । एक स्त्री के मानवाधिकार के उलंघन का इस से बड़ा उदाहरण फिलहाल हमें इस भारत वर्ष में नहीं दिखा।

दारा सिंह के स्वेक्षा से आत्मसमपर्ण को गिरफ्तारी का नाम दे कर अपनी झूठी पीठ थपथपाई गयी बाद में उनके साथ अमानवीयता की सीमा पार तक टार्चर किया गया जिसका हिसाब अभी सभी सनातनियों पर उधार है ।।। सनातन रक्षा को आगे आये व्यक्ति की दुर्दशा अब हिन्दू सहन नहीं कर सकते ।।। दारा सिंह जैसे हिन्दुओं को कोई पूछने वाला भी नहीं, और अगर दारा सिंह जैसे हिन्दुओं को भुला दें, तो ये तुम्हारे लिए शर्म से डूब मरने वाली चीज ही है !

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