गुस्से को कम कर सकती है - होम्योपैथिक दवाइयां - COVERAGE INDIA

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Monday, August 19

गुस्से को कम कर सकती है - होम्योपैथिक दवाइयां


डा. राजेश श्रीवास्तव, प्रयागराज। 
आजकल के बच्चों में तथा युवाओं में गुस्सा ज्यादा देखने को मिलता है जिसका कारण या तो मालूम नहीं या फिर मन चाही वस्तु नहीं मिलने से गुस्सा हो जाते हैं -
सावधान!

ज्यादा गुस्सा से बुजुर्गों में हृदय रोग, कैंसर समेत कई अन्य बीमारियों की सम्भावनायें -
अत्यधिक गुस्सा हमारे निर्णय लेने की क्षमता को न केवल कमजोर करता है, बल्कि लगातार गुस्सा करने से यह क्षमता समाप्त भी हो सकती है। गुस्से से कार्यक्षमता प्रभावित होती है और करियर व रिश्तों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वे लोग जो अपने गुस्से को प्रकट नहीं कर पाते और मन में ही दबा कर रख लेते हैं, वे ज्यादा चिड़चिड़े हो जाते हैं। उनमें शारीरिक और मानसिक बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।
शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि गुस्से का दिल पर काफी बुरा असर पड़ सकता है और इससे अचानक मौत भी हो सकती है। तो इस बार जब सड़क पर भारी यातायात के बीच जब कोई आपकी गाड़ी को टक्कर मार दे तो गुस्से में उत्तेजित होने से पहले थोड़ा रूक कर सोचिए कि क्या ऐसा करना ठीक होगा!

परिणाम -
वृद्ध लोगों के लिए उदासी से ज्यादा, गुस्सा हानिकारक होता है। इससे स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं जैसे इंफ्लेमेशन (सूजन) हो सकता है, इसका संबंध हृदय रोग, गठिया और कैंसर जैसे रोगों से होता है। नतीजतन गुस्से से इस तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन उदासी से नहीं।

गुस्सा कहीं अनुवांशिक तो नहीं - 
कुछ लोगों में गुस्से के दो बड़े कारण, अनुवांशिक या फिर शारीरिक संरचना हो सकती है। कुछ बच्चे ऐसे होते हैं, जो जन्म से ही चिड़चिड़े होते हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि भी गुस्से वाला स्वभाव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे व्यक्ति जिनके परिवार के लोग अवरूद्ध मानसिकता, परिस्थितियों को उलझाने वाले और भावनात्मक संवाद में कमजोर होते हैं, वे बहुत जल्दी क्रोधित हो जाते हैं। हालांकि गुस्सा आने के कई और भी कारण हो सकते हैं। 

गुस्से पर काबू पाना - 
खान-पान, योग और बेहतर लोगों के साथ उठने-बैठने से गुस्सा आने की समस्या को कम किया जा सकता है। लेकिन गुस्से के इलाज के लिए कुछ फिजियोलॉजिकल टेस्ट भी होते हैं। इन फिजियोलॉजिकल टेस्ट से गुस्से की तीव्रता को मापा जा सकता है। इस प्रकार जांच से पता चलता है कि व्यक्ति गुस्से के प्रति कितना संवेदनशील है और इस पर काबू कैसे पाया जा सकता है।

तनाव का कारण कहीं स्वयं की आदत तो - 
आप अपने बढ़ते तनाव के लिए कभी कामकाज तो कभी दफ्तर के माहौल को दोष देते हैं या फिर किसी गहरी समस्या को, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपकी भी कुछ ऐसी आदतें हैं जो तनाव को बढ़ाने का काम करती हैं। स्वयं परखें कि, वह कौन सी आदतें हैं जो आपके तनाव को बढ़ाती हैं।

अपर्याप्त नींद -
नींद की कमी आपको चिड़चिड़ा और सुस्त बना देती है। स्वस्थ जीवन के लिए दिन में कम से कम 8 घंटे की नींद आवश्यक है। इससे कम नींद लेने वाले लोगों में तनाव की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए अगर आपको कम सोने की आदत है तो इस आदत को शीघ्र बदलें।
 कैमोमिला, इग्नेसिया, सिना नक्स वोमिका, नैट्रम मयूर इत्यादि लक्षणों के आधार पर दी जा सकती हैं

नोट - होम्योपैथिक दवाइयां - स्वयं (खुद) से लेने का प्रयास ना करे 

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