पढ़िए बनारस की अम्मा की कहानी 'कवरेज इण्डिया' की ज़ुबानी, कुछ युवाओं की मदद से जल्द वापस आ सकता है जेल में बंद बेटा - COVERAGE INDIA

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Friday, August 30

पढ़िए बनारस की अम्मा की कहानी 'कवरेज इण्डिया' की ज़ुबानी, कुछ युवाओं की मदद से जल्द वापस आ सकता है जेल में बंद बेटा


इस सम्पूर्ण खबर को लिखा गया है इस अभियान में प्रमुख किरदार निभा रहे रंजीत कुमार जी से कवरेज इण्डिया की हुई वार्ता के अनुसार।

राष्ट्र के प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की 65 वर्षीय बीमार बुज़ुर्ग अम्मा के बेटे महेन्द्र वर्मा जो नेपाल में एक दुर्घटना के केश में नेपाल जेल में सज़ा काट रहा है इस केश की जाँच पड़ताल करते जब हमारी टीम नेपाल पहुँची तो मामला साफ़ हुआ आख़िर अम्मा का लाड़ला इस अपराध से कब तक बरी होगा ,कितनी सज़ा हुई थी ,कितनी शेष है इस सम्बंध में आज नेपाल के कारागार में सज़ा काट रहे क़ैदी महेन्द्र वर्मा से मुलाक़ात की तो उसने बताया की घटना मेरे वाहन से नही बल्कि मेरी आगे चल रहे वाहन से हुई थी मैंने सिर्फ़ उसकी हालात देखने के लिए अपना वाहन खड़ा किया था पर नेपाल पुलिस ने मुझे आरोपी बना कर जेल भेज दिया उस दुर्घटना में मोटर साईकिल चालक की मौक़े पर ही मौत हो गई थी और उसका साथी गम्भीर रूप से घायल हो गया था


मोटर अधिनियम नेपाल
इस संबंध में नेपाल सरकार की अधिवक्ता राधा उपाध्याय से बातचीत हुई  तो उन्होंने बताया  की इस प्रकरण में मृतक के परिजन को 5 लाख रुपये व घायल व्यक्ति को 3 लाख रुपये cdo  के समक्ष दोनो परिवार को देना होगा
अगर इस दौरान घायल व्यक्ति पूर्णतया  अपाहिज हो जाता है तो उसकी देख रेख ख़र्च का पूरे जीवन भर का ज़िम्मेदारी इनकी होगी -उन्होंने बताया कि घायल व्यक्ति ने 17 लाख का मेडिकल  ख़र्च लगाया है पर नियमावली के अनुसार सिर्फ़ 3 लाख ही देय है ।

बताते चलें दुर्घटना में कोर्ट ने महेन्द्र को 48 महीने की सज़ा और 5 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया था जिसमे अब तक 33 माह की सज़ा महेन्द्र वर्मा काट चुका है 15 माह बाक़ी है इसका जुर्माना परिजनों को भरना होगा तभी इसका छूट पाना सम्भव है नेपाल देश में मोटर अधिनियम में इन हालातों में माफ़ करने का कोई प्रविधान नही है ।

जेलर ने कहा शेष सज़ा हो सकती  है माफ़
इस पूरे प्रकरण में कारागार अधीक्षक जगत बहादुर बसनेत से  लम्बी वार्ता हुई तो उन्होंने बताया की इस क़ैदी पर दो मामले चल रहे हैं -दुर्घटना में एक की मौत का और दूसरा दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल करने का ।

रंजीत कुमार, नेपाल जेल के जेलर के साथ

एक दुर्घटना में व्यक्ति की मौत हो गई थी और दूसरा व्यक्ति घायल हो गया था जिसका ईलाज चल रहा है इन दोनो मामलों में इस क़ैदी को 4 साल की क़ैद और 5हज़ार का जुर्माना कोर्ट द्वारा लगाया गया है वही सवारी यातायात व्यवस्था नेपाल 2059 (मोटर अधिनियम )के तहत 5 लाख रुपये मृतक परिवार को अथवा घायल व्यक्ति के परिवार को 3 लाख रुपये देने होंगे।

क़ैदी को चार साल की सज़ा है अगर ये जुर्माना नही देता है तो उस सज़ा में तक़रीबन 8 वर्ष की सज़ा और बढ़ जायेगी उन्होंने बताया की अगर इस क़ैदी का जुर्माना जल्द जमा करवा दिया जाये तो इसकी शेष सज़ा माफ़ हो सकती है नेपाल सरकार समय समय पर ठीक आचरण वाले क़ैदी को जेल की रिपोर्ट पर दशहरा ,गणतंत्र दिवस के अवसर पर सज़ा माफ़ करती है उन्होंने कहा कि घायल और मृतक के परिवार को राशि दे देने के बाद शेष सजा माफ़ी की फ़ाईल शासन को भेजी जायेगी ।

बताते चलें कि क़ैदी ने अभी तक 48 माह में से 33 माह की सज़ा पूरी की है अगर जुर्माना नही देता है तो 8 लाख 5हज़ार रुपये को 48 महीने पूरे होने के बाद से 3 सो रुपए प्रतिदिन के हिसाब से कम होगा उसे तब तक नेपाल की जेल में रहना होगा उस सज़ा के दौरान अगर घायल व्यक्ति अपाहिज हो जाता है (अभी ईलाज जारी है )तो उसका भारत आना सम्भव नही होगा

फिर अम्मा के जीवनकाल में बेगुनाह बेटा आ पायेगा भारत  या नही ? बड़ा सवाल
बीमार रहने वाली अम्मा 8 लाख 5 हज़ार जुर्माना सहित 1 लाख रुपये अतिरिक्त ख़र्च (वक़ील ,दस्तावेज़ ,दौड़भाग ,वाहन छुड़ाने में ) कहाँ से देंगी ?सबसे बड़ा सवाल है हम साथी की औक़ात नही जो इतनी बड़ी रक़म ख़ुद के पास से दे सकें मैं रंजीत कुमार कर्म से पत्रकार हूँ तो साथी प्रकाश धर्म से सेवक है दोनो की छमता इतनी नही  है जो इतनी बड़ी राशि को ख़र्च कर पायें सत्ता में बैठे लोग मुक़दर्शक की भूमिका में हैं ।

अम्मा ने बनारस के हर विधायक और सांसद के दहलीज़ पर माथा टेका है पर लोगों ने दुत्कार ही दिया कारण भिखारी को चवन्नी देने का स्वभाव जो  है मदद करने की भावना भारतीय राजनेताओं में नही है वरना अम्मा की ज़िम्मेदारी  अब तक कोई न कोई जनप्रतिनिधि ले चुका होता।

आपको बता दूँ ज़िलाधिकारी  जो पूरे जनपद का राजा होता है अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन कर दे तो जनपद का कोई भी व्यक्ति हमारे देश में भूखा और नंगा नही रहेगा पर इसी प्रकरण में बता ये परिवार काफ़ी ग़रीब है न रहने को घर है न सौचालय ,विधवा पेंशन न बुढ़ापे का पेंशन ,न राशन कार्ड मतलब सरकार की किसी भी योजना का लाभ इन्हें नही मिला हाँ जब न्याय की गुहार अम्मा ने लगानी चाही तो उन्हें पूरे पूरे दिन पुलिस स्टेशन में भूखे रखा गया उनको बोलने से रोका गया उनके अधिकारों का हनन किया गया ।

ये हालात भारतीय व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाता है
इन स्थितियों परिस्थियों में अम्मा के ज़िंदा जी उनके बेटे को लाना सम्भव नही दिखता ? कोई चमत्कार हो जाये कोई मसीहा बन आ जाये तभी इनके ज़िंदा में कुछ उम्मीद जग सकती है

हमारी और आपकी भूमिका
रंजीत कुमार और प्रकाश ,सच्चिदानंद ने अम्मा के लाड़ले के सम्बंध पूर्ण जानकारी प्राप्त कर ज़िम्मेदारों और  आप लोगों  तक पहुँचाने की एक कोशिश की है पर इसमें आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है अगर आप आमजन इस मामले में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें तब इस प्रकरण में कुछ और प्रयास  किया जा सकता है अन्यथा इस अंधेर नगरी में मनोबल गिरता नज़र आ रहा है । 

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