लाचार मां के एकमात्र सहारे को नेपाल से छुड़ाने के लिए गोरखपुर के युवाओं ने कसी कमर, नेपाल रवाना - COVERAGE INDIA

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Wednesday, August 28

लाचार मां के एकमात्र सहारे को नेपाल से छुड़ाने के लिए गोरखपुर के युवाओं ने कसी कमर, नेपाल रवाना


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क गोरखपुर। 
बनारस बेटा 28 वर्षीय महेन्द्र नेपाल के नवल परासी जेल में बंद है, महेन्द्र की अम्मा बताती हैं जिस दिन महेन्द्र नेपाल गया था उसके दूसरे दिन उसने फ़ोन किया और बताया की माँ मुझे नेपाल पुलिस ने पकड़ लिया है और मुझे जेल ले जाया जा रहा है। महेन्द्र ने अपनी माँ को बताया की माँ रास्ते में एक मोटर साइकिल वाले का एक्सिडेंट हुआ था जिसे मैंने गाड़ी खड़ी कर के स्थिति देखना चाहा ही था की तब तक नेपाल पुलिस ने मुझे ही पकड़ लिया और थाने लेकर चली आइ और आज अपराधी बना कर जेल भेजा जा रहा है
माँ बिबस थी चाह कर भी कुछ नही कर पा रही थी और अंततः उसे सज़ा हो गई और वह इस  समय नेपाल में सज़ा काट रहा है

परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय ,माँ भीख माँग कर चलाती हैं जीविका
आम्मा का एक ही बेटा था जो काम  कर खिलाता था और मकान का किराया भरता था पर उसके जेल जाने  के बाद से माँ की ज़िंदगी नर्क हो गई ६५ साल की उम्र में  में न कोई काम कर सकती है न कोई रोटी का प्रबंध करने वाला था माँ ने बहू को समझा बुझा कर हालातों का हवाला देकर उसे माईके भेज दिया
और ख़ुद चौराहों पर भीख माँग कर अपना पेट पालने लगी जो पैसे बचते थे उससे वो मकान का किराया देती हैं इस समय दो माह से किराया न दे पाने के कारण मकान मालिक द्वारा  भी मानसिक तौर पर प्रताड़ित की जा रही हैं अम्मा की उम्र ६५साल है हड्डियों का दर्द काफ़ी दुःख दे रहा है
पर बेटे के मोह में पूरा दिन कभी भीख तो कभी नेता तो कभी अधिकारियों के चक्कर लगाती रहती हैं पर रूकती नही हैं

दफ़्ती पर लिखे प्रार्थना की तस्वीर हुई थी वायरेल
शोसल मीडिया पर आम्मा की एक तस्वीर जिसमें तखती लिए वो प्रधानमंत्री जी से आपने बेटे के छुड़ाने की अपील कर रही हैं वह तस्वीर गोरखपुर के एक पत्रकार ने अपनी वाल पर शेयर करते हुए समाज के जागरूक लोगों से मदद करने की अपील की थी जिसमें समाज के एक जागरूक समाज सेवी मित्र प्रकाश ने क़दम बढ़ाकर उन पत्रकार के साथ बनारस की पुलिस से सम्पर्क साधा और अम्मा के घर पहुँचेऔर सच जाना

किसी अधिकारी /नेता ने नही सुनी समस्या और पुलिस करती रही परेशान
अम्मा पढ़ी लिखी  नही हैं पर किसी से प्रार्थना कर एक दफ़्ती पर अपनी समस्या लिखवॉ ली हैं और हर ज़िम्मेदारों के सामने वो उसे लेकर खड़ी रहती हैं पर ज़िलाधिकारी देखते हैं पर उनका कहना है वो पत्र नही देती
-बिना मकान -बिधवा पेंशन के जीवन जी रही हैं माँ और सरकार बड़े बड़े दावे पेश कर रही है

इतना दर्द ऊपर से पुलिस की प्रताड़ना
बनारस के बेटे देश  के प्रधानमंत्री जब जब आते हैं तब अम्मा उनसे मिलने का प्रयास करती हैं पर पुलिस उन्हें अपराधियों  की भाँति थाने में पूरा दिन भूनखे बिठाये रहती है और शाम छोड़ देती है

गोरखपुर के एक पत्रकार की मुहिम और समाजसेवी की मदद से एक आस जगी है दोनो ने भारत सरकार से लेकर नेपाल सरकार से मदद की गुहार लगाई है अब देखना है की भारत का ये लाल अपने वतन कब वापसी करता है

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