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Monday, May 20

भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को नहीं निकला तो क्या नितीश बाबू आप NDA से निकलेंगे…?


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
लोकसभा के चुनाव संपन्न हो गये है। मोटे तौर पर एक्जिट पोल भी घोषित हो चुके है। सातवें और आखिरी चरण के अंतिम दिन एक्जिट पोल आने से कुछ समय पहले बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार ने मतदान करने के बाद मीडिया से बातचीत की और कहा कि भाजपा की प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर ने गांधी के हत्यारे गोडसे को देशभक्त बताकर गलत किया है। ये गांधीजी का घोर अपमान है।

भाजपा को चाहिए कि ऐसी मानसिकता वाले प्रत्याशी को पार्टी से निकाल दें। नितिश कुमार वही है जिन्होंने एक समय नरेन्द्र मोदी के लिए बिहार में सार्वजनिक तौर पर नो एंट्री घोषित की थी। उन्होंने मोदी को बिहार में चुनाव प्रचार करने से मना किया था और भाजपा की नेतागीरी ने उनकी बात मानी भी थी लेकिन आज वही नितिश कुमार मोदी के साथ सार्वजनिक मंच साझा करते दिखाई दिए है। चुनाव के प्रचार में मोदी के साथ-साथ लोगों का अभिवादन लेते हुए दिखाई दिये है। ऐसा आखिर क्या हुआ कि वही नितिश बाबू को मोदी से दोस्ती करनी पड़ी? वजह चाहे जो भी हो लेकिन इस वक्त जो उन्होंने चुनाव के अंतिम चरण में प्रज्ञा का मामला उठाकर मांग की है उसे सियासी गोगल्स से देखना होगा।

पिछले कुछ समय से नितिश बापू भाजपा से उखड़े-उखड़े नजर आ रहे थे। एक चुनावी सभा मे जब मोदी जोर शोर से वंदेमातरम के नारे लगवा रहे थे और रामविलाश पासवान समेत नितिश बाबू के इर्दगिर्द बैठे सभी हाथ उपर कर वंदेमातरम बोल रहे थे तब नितिश बाबू चुपचाप बैठे रहे। उन्होंने वंदेमातरम क्यों नहीं बोला और इसके पीछे क्या राजनीतिक समिकरण हो सकते है इसकी भी चर्चा हुई थी। क्या नितिश बाबू एनडीए से निकलने की कोई अवसर खोज रहे हैं?

यह सवाल इसलिए भी जरुरी है क्यों कि प्रज्ञा ने गोडसे वाला बयान दिया उसके कुछ दिन बाद नितिश बाबू को गांधी की याद आयी यदि ऐसा न होता तो जिस दिन साध्वी ने चिल्ला चिल्ला कर कहा कि गोडसे देशभक्त थे है और रहेंगे तब नितिश बाबू ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यदि उनके मन में वाकई गाँधी जी के लिए प्रेम, आदर, सम्मान होता और गोडसे के लिए नफरत, धिक्कार होता तो वे उसी वक्त यह मांग करते कि भाजपा ऐसे प्रत्याशी को पार्टी से निकाल दे। लेकिन उस वक्त वे सियासी रणनीति के तहत चुप रहे और जब ऐसा माहौल बना की मोदी सरकार फिर नहीं बन रही तब उन्होंने गाँधाी गोडसे वाला प्रकरण छेड़ दिया और भाजपा से मांग की कि ऐसे प्रत्याशी को निकाल बाहर कर दे।

माना कि साध्वी ने गांधी जी का घोर अपमान किया नितिश बाबू ने भाजपा को आड़े हाथो लिया और साध्वी को पार्टी से निकालने की मांग कर डाली। यदि भाजपा साध्वी को नितिश बाबू की मांग के बाद पार्टी से न निकाले तो क्या नितिश बाबू एनडीए से नाता तोड़नेंगे, निकल जायेंगे, इस्तीफा दे देंगे या क्या करेंगे।? क्यों कि साध्वी प्रज्ञा कोई साधारण प्रत्याशी नहीं। भाजपा ने हिन्दू आतंकवाद को जवाब देने के लिए साध्वी को भोपाल सीट से कांग्रेस उस प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में उतारा जिसने हिन्दू आतंकवाद का आरोप भाजपा के सर लगाया था।

असल में समझौता एक्सप्रेस- मालेगांव बम धमाका आदि टैरर केस में साध्वी को यूपीए की सरकार में आरेस्ट किया गया था साध्वी के साथ आसिमानंद और अन्य साथियों को भी गिरफ्तार किया गया था। सरकार बदलते ही असिमानंद निर्दोष निकल आये। साध्वी को भी जमानत मिली और सीधे भोपाल भेज दी गई । नितिश क साध्वी का बयान यदि खटक रहा है और गांधी जी के लिए इतना ही प्रेम है जितना गोडसे के लिए धिक्कार है तो भाजपा से नाता तोड़ लेना चाहिए। बिहार में भाजपा- जेडीयू की मिलीजुली सरकार का अंत लाना चाहिए। लेकिन क्या नितिश बाबू ऐसा करेंगे?

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