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Monday, May 27

मन का स्थान भक्ति से है - हरिहरानंद जी महराज


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क प्रयागराज। 
उतरांव (प्रयागराज)उतरांव क्षेत्र के चका गांव में शांति आवास पर चल रहे भागवत महापुराण के प्रथम दिन भागवत माहात्म्य,  रहस्य शुख प्राकट्य आदि कथा कही गई। जिसमें कथावाचक हरिहरानंद महाराज जी ने कहां की भागवत महापुराण में भक्ति ज्ञान वैराग्य का स्थान मन, बुद्धि, विवेक, की असहज सावधानी से स्थित है। विवेक जितना प्रकट हो उतना ही  ज्ञान तथा बुद्धि, जितनी प्रखर हो उतना ही वैराग्य की प्राप्ति कराने में संभव है। और मन का स्थान भक्ति से है।


जो भाव से ही असहज प्राप्ति हो सकती है। वृंदावन धाम में ज्ञान वैराग्य के उपदेश देते हुए, देवर्षि नारद ने भक्ति को भी परम भागवत में बताया। भागवत कथा के आयोजक जवाहर लाल गुप्ता व शांति गुप्ता ने आए हुए श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। निवेदक अनिल गुप्ता ने पंडाल में ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु आने के लिये विनती की। इस अवसर यज्ञाचार्य पण्डित रामराज शास्त्री, निर्मला, सुशीला, गीता गुप्ता, अनीता, संगीता, सुनीता, सरिता, ममता, सुनील गुप्ता ,प्रदीप, दिनेश, सुरेश, लल्लू गौतम चका, राधेश्याम, आदि सैकड़ों की संख्या में भक्तगढ़ मौजूद रहे।

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