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Wednesday, May 29

मोदीजी, जातिवाद - कौमवाद के रहते कैसे होगा नये भारत का निर्माण…?


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
देश की राजधानी दिल्ही इन दिनों कीसी के पास समय नहीं। प्रशासन में हर कोइ नई सरकार को बनाने में लगे है। 30 मई को नरेन्द्रभाइ मोदी की अगुवाई में मोदी-2.0 सरकार बन गइ होंगी। सभी होंगे लेकिन पायल तडवी इसे देखने के लिये अब इस दुनिया में नहीं। हो सकता है की आदिवासी समाज की इस दाक्तरी की छात्राने मोदी को भी वोट दिया होंगा। शायद उन्हें भी विश्वास होंगा की अब नये भारत में वाक्इ में कोइ जातिवाद, कोइ कोमवाद या कोइ आतंकवाद नहीं होगा। लेकिन उस बेचारी को क्या पता की वो खुद ही जातिवाद का शिकार बन जायेंगी और उसे इतना सताया जायेगा की आत्महत्या करनी पडेगी। एसा नहीं की पायल को सतानेवाले समजदार नहीं थे। पायल खुद पीजी की मैडिकल छात्रा थी। और उसे आदिवासी या नीची जाति कहनेवालीयां भी दाक्तरी की ही छात्रा थी जो दाक्तर बन कर समाज के सभी जाति के लोगों का इलाज करनेवाली थी। फिर भी उन्होंने पायल को इतना सताया की बस…

पायल तडवी ने कथित तौर पर अपनी वरिष्ठ सहकर्मियों द्वारा रैगिंग और जातीय टिप्पणी किए जाने से परेशान होकर खुदकुशी कर ली थी। तडवी ने 22 मई को खुदकुशी कर ली थी। डॉक्टर पायल का एडमिशन आरक्षित कोटे से हुआ था। इसी बात का जिक्र कर पायल के सीनियर उन्हें प्रताड़ित करते थे। पायल तडवी के परिवार वालों का भी आरोप है कि तीनों महिला डॉक्टरों ने उनके अनुसूचित जनजाति का होने को लेकर ताने कसते थे और मानसिक रूप से प्रताणित करते थे। पायल तडवी मुंबई के बीवाईएल नायर हॉस्पिटल में एमडी सेंकड ईयर की छात्रा थीं।

दिल्ही निक्ट गुरूग्राम में अल्पसंख्यक वर्ग के एक युवक से जबरन जयश्री राम बुलवाने घटना घटी। बिहार में एक युवक से नाम पूछा और वह मुस्लिम होने पर उसे गोली मार दी गइ। ये कुछ घटनायें ऐसे समय में बनी है जब मोदीजी ने अपने विजयी संबोधन में कहा था की नये भारत में अब कोइ जातिवाद नहीं होगा, कोइ कोमवाद नहीं और कोइ प्रांतवाद भी नहीं। आंध्रप्रदेश के नये बनने जा रहे मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डीने मोदीजी से मुलाकात करके यह मांग की कि आंध्र को विशेष राज्य का दरज्जा दिया जाय। क्या इसे प्रांतवाद कहा जा सकता है क्या..? मसलन नये भारत शुरू होने से पहले ही जातिवाद में एक होनहार आदिवासी छात्रा की जान चली गइ। मुंबइ-महाराष्ट्र में या पायल जहां रहती थी वहांके नये चुने गये सांसद उनके परिवार से मिले या नहीं ये तो वे ही जाने। लेकिन ये घटनायें पहले होती थी तो नये भारत की दुहाई दी जाती थी की बस एक बार नया भारत बनने के लिये मुझे सत्ता दो फिर देखो। दुनिया ने देख लिया। मैडिकल जैसे क्षेत्र में भी जातिवाद का इतना जहर फैला है ये ताज्जुब की बात है।

मुंबइ जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में मेडिकल की पीजी की छात्रा जो खुद एक डोक्टर बन चुकी है उसे नीची जाति की कह कर ताने मारना कुछ शुभ शुभ नहीं नये भारत के लिये। लगता है की नये प्रधानमंत्रीजी को यह सब मिटाने के लिये जरा जल्दी करना होगा ताकि कोइ और पायल का बलिदान न देना पडे, कोइ और कीसी को कीसी को नाम पूछ कर गोली न मार दी जाय..! कहते है न जहा चाह, वहा राह…मोदीजी देशने आपकी चाहना देख कर आपकी राह बनाती है। अब बस उस पर ऐसी फर्राटे के साथ सब का साथ-सब का विकास-सबका विश्वास की गाडी चलाये की जातिवाद-कोमवाद-आतंकवाद-नक्सलवाद उसके नीचे कुचल दिये जाय और एक नये भारत का निर्माण हो। मोदीजी, ऐसा होगा न…कीसी आदिवासी समाज की पायल को खुदकुशी तो करनी नहीं पडेंगी न…? समय की टीक टीकी चल पडी है, देखे क्या होता है…!

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