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Wednesday, May 29

सूखे से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश कराएगी महाराष्ट्र सरकार


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
मुंबई। सूखे की मार झेल रहे किसानों और मॉनसून आने में देरी के चलते फडणवीस सरकार ने कृत्रिम तरह से बारिश कराने का निर्णय लिया है। इस पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। कृत्रिम तरीके से बारिश कराने की मंजूरी फडणवीस मंत्रिमंडल ने दी है। 2015 में कृत्रिम तरह से बारिश कराने का प्रयोग किया गया था, जो सफल नहीं रहा था। इससे पहले 2003 में नाशिक में कराया गया कृत्रिम बारिश का प्रयोग सफल रहा था।

इन दिनों महाराष्ट्र भीषण गर्मी से जूझ रहा है। राज्य की 151 तहसील और 260 मंडलों में 4,920 गांव और 10,506 छोटे गांव सूखे से पीड़ित हैं। इसी बीच मौसम विभाग ने मॉनसून में देरी की भविष्यवाणी की है। इधर, राज्य के 26 जलाशयों में जल भंडारण शून्य के आसपास पहुंच गया था। इससे सरकार के पसीने छूट रहे हैं। आने वाले दिनों में राज्य में विधानसभा के चुनाव भी हैं। सकते में आई सरकार कई दिनों से कृत्रिम बारिश कराने पर विचार कर रही थी और अब उसे वह साकार रूप देना चाहती है। मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट ने एरियल क्लाउड सीडिंग का उपयोग कर कृत्रिम बारिश कराने पर अपनी सहमति दी है। इस पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च आएगा। राज्य में सूखाग्रस्त मराठवाडा, विदर्भ और पश्चिम महाराष्ट्र में इस तकनीकी के जरिए बारिश कराकर सूखे से निपटने की तैयारी है। इसके लिए औरंगाबाद में सी बैंड डॉपलर रडार और विमान तैयार हैं। सरकार का कहना है कि कृत्रिम बारिश से काफी मदद मिल सकती है।

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