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Tuesday, May 21

परिणाम के बाद यूपी में सरकार और शासन में दिखेगा व्यापक बदलाव


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क।    
लखनऊ। लगभग इतना तो तय दिख रहा है कि भाजपाा को 2014 के मुकाबले इस बार सीटें नही मिल रही है। परिणाम अगर वाकई भाजपा को यूपी में मनमुताबिक सीटे नही मिली तो कुछ मंत्रियो के कद घटाए जा सकते है। मंत्रिमण्डल पर विस्तार सम्भवतः जून के पहले सप्ताह में हो जाए। जबकि लम्बे समय तक चले चुनाव के चलते प्रभावित हुए विकास कार्य और जनता के रूके कामों में तेजी लाने के लिए योगी सरकार बड़े स्तर पर प्रशासनिक अफसरों पर फेरबदल करने के साथ ही जनता के प्रति जिम्मेदारी न समझने वाले दर्जनों अफसरों किनारे किया जा सकता है। कुल मिलाकर चुनाव प्रक्रिया से निपटे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने तेजी से विभागों की फाइलों को तलब करना शुरू किया है। सूत्रों के मुताबिक एपीसी के रिक्त पद पर नाम लगभग फाइनल हो चुका है। इसकी घोषण एक दो दिन में हो सकती है।

इधर मंत्रिमंडल से ओमप्रकाश राजभर की बर्खास्तगी के बाद फिर से मंत्रिमंडल के पुनर्गठन और विस्तार की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की जरूरत लोकसभा चुनाव में यूपी के विभिन्न सीटों पर खड़े मंत्रियों के चुनाव जीतने के कारण भी होगी। 23 मई को चुनाव परिणाम आने और नई सरकार के गठन के बाद जून के पहले हफ्ते में मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। राजभर के निकलने के बाद अब 46 मंत्री और मुख्यमंत्री समेत 47 सदस्यीय मंत्रिमंडल में राजभर को बाहर किए जाने के बाद अब 46 मंत्री हैं। राजभर का पिछड़ा व दिव्यांग कल्याण विभाग मुख्यमंत्री के अधीन आ गया है। मानक के अनुसार सीएम अपने मंत्रिमंडल की संख्या 60 तक रख सकते हैं। 

चुनाव लड़ रहे चार मंत्री यदि सांसद बन जाते हैं, तो उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ेगा। 23 को परिणाम आने के बाद चुनाव जीतने वाले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा फौरी तौर पर मुख्यमंत्री अपने पास या सहयोगी मंत्रियों के बीच कर सकते हैं लेकिन कुछ दिनों में उन्हें मंत्रिमंडल का विस्तार करना ही पड़ेगा।लोकसभा चुनाव में प्रदेश के चार काबीना मंत्री अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें इलाहाबाद से परिवार महिला कल्याण व पयर्टन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, आगरा (सु.) पशुधन मंत्री एस.पी. सिंह बघेल, कानपुर से खादी, लघु उद्योग मंत्री सत्यदेव पचैरी व सहकारिता मंत्री अम्बेडकरनगर से मुकुट बिहारी वर्मा हैं। असम के प्रभारी महेन्द्र सिंह व मध्य प्रदेश के प्रभारी स्वतंत्रदेव सिंह की पदोन्नति दोनों राज्यों के परिणामों पर निर्भर है। चुनाव के समय प्रभारी बनाए गए मंत्रियों की अपनी सीटों के प्रत्याशियों के हारने-जीतने पर मंत्रिमंडल में उनका कद तय होगा।

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