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Thursday, April 4

अलगाववादी भाषा बोलनेवाली महेबुबा के सामने देशद्रोह की धारा क्यों नहीं..?


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
जम्मु कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री जिनके साथे गठबंधन करके भाजपाने सरकार चलाई थी वह महेबुबा मुफ्तिने भारत सरकार को सीधे सीधे चेतावनी दी है की यदी धारा 370 ओर धारा 35ए को दूर करने की कोशिश की जायेगी तो कश्मीर भारत से अलग हो जायेगा। कश्मीर का भारत से नाता पूरा हो जायेगा ओर इसके लीये भाजपा जिम्मेदार होगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाहने एक साक्षात्कार में यह कहां की 2020 तक राज्य सभा में भी उनकी सरकार का बहुमत प्राप्त होते ही जम्मु कश्मीर को विशेष दरज्जा देनेवाली दो धाराए 370 ओर 35ए को दूर करेगे।

इसे लेकर पीडीपी की नेता मुफ्तिने चेतावनी दी की यदी एसा होता हे तो 2020 जम्मु कश्मीर के लीये आखरी डेडलाईन होगी, यदी आप इसे दूर करेगे तो भारत के साथ हमारा रिश्ता भी पूर्ण हो जायेगा।
पीछले पांच साल में भाजपा सरकार ने राजद्रोह कानून का ईस्तमाल कर हार्दिक पटेल, कनैयालाल जैसे युवाओ को जेल के सलाखो के पीछे डाल दीया था। उन्हो ने महेबुबा की तरफ भारत से अलग होने की या भारत के टुकडे टुकडे करने की कोई चेतावनी नहीं दी थी, लेकिन कहा जाता है की राजनीतिक उद्देश से राजद्रोह या देशद्रोह का उपयोग कीया गया।

अब जब की कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने खुल्लेआम डंके की चोट पर भारत सरकार को चेतावनी दी हे की यदी धारा 370 समाप्त होती है को कश्मीर भी भारत से अलग हो जायेगा। उन्हो ने कश्मीर को भारत से अलग करने की यानी की भारत के टुकडे करने की चेतावनी दी है। केन्द्र की मोदी सरकार ने कश्मीर के अलगाववादीओ के खिलाफ सख्त कार्यवाही की है, उनकी बेनामी संपत्तिया जप्त की है, उनको दी गई सुरक्षा वापस ली गइ है ओऱ उनके खिलाफ अन्य कार्यवाही चल रही है तब महेबुबा मुफ्ति के खिलाफ भी राजद्रोह का जुर्म दाखिल कर उन्हे भी जेल की सलाखो के पीछे धकेल देना चाहिए।

कानून सब के लीये एकसमान है। यदी युवा नेताओ को राजद्रोह के तहत जेल में डाल सकते है तो महेबुबा मुफ्तिने भी भारत सरकार के खिलाफ जहर उगला है। कश्मीर को भारत से अलग करने की चेतावनी दी है, चेलेन्ज दीया है। एसे में मोदी सरकार इसका संज्ञान लेते हुए महेबुबा के खिलाफ कडी कार्यवाही करनी चाहिए।

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो भारत के अन्य राज्यो में रहते नागरिक कश्मीर में जमीन जायदाद क्यो नहीं खरीद शकते…? अन्य राज्य के लोग कश्मीर में क्यूं नहीं बस सकते…? इस प्रावधान के लीये धारा 370 को दूर करना आवश्यक है। 2020 में राज्य सभा में भाजपा की मेजोरिटी होने तक राह देखने की बजाय मोदी सरकार मुफ्ति को जेल में डाले ताकी यासिन मलिक की अलगाववादी भाषा बोलनेवाली महेबुबा को भी पता चले की अलगाववाद क्या होता है। यदी उनके खिलाफ कोइ एक्शन नहीं लीये जाते है तो अन्य अलगाववादीओ के खिलाफ भी कोइ एक्शन लेना नहीं चाहिए। आखिर कब तक कश्मीर के लीये एसी भाषा का प्रयोग होता रहेगा?

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