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Thursday, April 4

मतदाता को ही तय करने दे, कोंग्रेस के वादे खतरनाक है या अच्छे दिन..?


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
अभी हाल ही में विदेश से उपचार कराकर आये वित्त मंत्री अरूण जेटलीजीने लोकसभा चुनाव में भाजपा की पूरी जिम्मेवारी मानो अपने उपर ले ली हो इस तरह वे मिडिया में कोंग्रेस के खिलाफ काफी कुछ लिख रहे है। अच्छा है इस बहाने थोडा दिल भी बहल जाये और पार्टी में भी सभी को लगे की जेटलीजी भी लगे है जवाब देने में। आम चुनाव के भद्दे नजर कांग्रेसने अपना घोषणापत्र जारी किया।
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चुनावी मेनीफेस्टो में तो वादे ही होते है। जैसे 2014 में भाजपाने 15 लाख, हर वर्ष 2 करोड को रोजगारी आदि का वादा किया था। कोंग्रेस के चुनावी वायदों को जेटलीजीने बार बार पढ कर बताया की ये वायदे खतरनाक है, देश की एक्ता के लिये खतरा है, इस पार्टीने देश को तोडने वाले वादे किये है…! उन्हों ने राजद्रोह की धारा समाप्त करने के वादे को भी खतरनाक बताया।
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कांग्रेस के बाद भाजपा का भी चुनावी मेनिफेस्टो जाहिर होनेवाला है जिसमें ऐसी ही कुछ वादे किये जायेंगे। कोंग्रेस उनकी आलोचना करेंगी। लेकिन कोंग्रेस का मेनिफेस्टो यदि देश के लिये खतरा या खतरनाक है तो इसका फैसला किसे लेना चाहिये..? कौन ये तय करेंगा की कोंग्रेस नें जो कहा वह गलत है या सही..? जाहिर है की यब तय करनेवाला एक ही है और वह है आम मतदाता। जिसे अपना ओर खिंचने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद बार बार लगातार कोशिश कर रहे है।
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मतदाता को तय करने दो की कोंग्रेस की हर महिने 6 हजार की सहायतावाली योजना सही है या गलत है..? राजद्रोह में पिछले 5 साल में कीस की क्यों गिरफतारी क्यों हुइ ये भी जेटलीजी भलीभांति जानते है। मतदाता तो तय करने दो की राजद्रोह की धारा रखनी है या नहीं..? कोंग्रेसने एक साल के भीतर भीतर 22 लाख लोगों को सरकारी नौकरीयां देने का भी वादा किया हे।
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2014 के चुनाव में भाजपाने हर वर्ष 2 करोड रोजगारी का सृजन करने का वादा किया था। कांग्रेसने अपने मेनिफेस्टो में 22 लाख नौकरिया तो ताबडतोड देने का वायदा किया है। 2 करोड के सामने 22 लाख रोजगारी तो मिल ही सक्ती है। एसे कइ वादे किये है। जो किसी को पसंद आये कीसी के मन भाये या कीसी के मन न भाये तो चुनाव में कोंग्रेस को उसका वोट न भी मिले।
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वह नोटा का बटन दबा सक्ता है। सबकुछ मतदाता के हाथ में है तब जेटलीजी मतदाता को ही तय करने दे की कोंग्रेस के वादे खतरनाक है या अच्छे दिन वाले..! मतदाता जो तय करे वही फाइनल होंगा। आप परेशान न हो। आप की तबियत भी तनिक ठीक नाही। इसलिये मतदाता को ही ये जिम्मेवारी सोंप दे तो बढिया होंगा। आराम किजीये…!

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