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Sunday, April 7

मानक को ताख पर रखकर जिला विकास अधिकारी ने घरेलू ब्लाक में तैनात कर दिए ग्राम विकास अधिकारी


सानू सिंह चौहान, कवरेज इण्डिया शाहजहांपुर। 
शाहजहांपुर जलालाबाद।जिला विकास अधिकारी से सांठ गांठ करके ग्राम विकास अधिकारियों ने अपने घरेलू ब्लाकों में तैनाती करवा रखी है।घरेलू ब्लाक में तैनाती कराने का मुख्य उद्देश्य जम कर भ्रस्टाचार करना और विरोध करने बालों पर दबाब बनाकर शांत करवा देना।जबकि नियमानुसार किसी भी ग्राम विकास अधिकारी को घरेलू ब्लाक में तैनात नही किया जा सकता है।

लेकिन पूर्व में तैनात जिला विकास अधिकारी ने जलालाबाद ब्लाक में सचिव श्याम वीर सिंह की तैनाती कर दी।जबकि ग्राम विकास अधिकारी श्याम वीर सिंह इसी ब्लाक के रहने बाले है ।यही नही उनका खुद का मकान ब्लाक कार्यालय से महज 200 मीटर दूर है।
घरेलू ब्लाक के होने के कारण भृस्टाचार की जांचों में बाधा उत्पन्न करते है।इनके स्थानीय होने के कारण ग्रामीणों के साथ व्यवहार भी सही नही रहता है।बीते दिवस एक 70 साल की विधवा अपनी पेंशन कट जाने के कारण जब ग्राम विकास अधिकारी को तलाशती हुई ब्लाक में आई ।भयंकर गर्मी में पैदल ब्लाक में ग्राम विकास अधिकारी को तलाशती रही कई लोगों से पूंछने के बाद जब महिला को एक अन्य ग्राम विकास अधिकारी के कमरे में श्यामवीर सिंह मिले जब गरीब विधवा ने अपनी पेंशन कट जाने की बात सचिव महोदय से कही तो सचिव साहब ने उस महिला को ऐंठते हुए फटकार दिया कि वह क्या करे पेंशन कट गई तो कट गई ।बेचारी वृद्ध विधवा कहती रही बेटा कुछ तो रास्ता बता दो लेकिन सचिव ने उसको फटकार कर भगा दिया।यह सारा बाकया हमारी आंखों के सामने हुआ।
स्थानीय होने के कारण ग्राम प्रधानों से भी इनका व्यवहार सही नही रहता है ।ग्राम फरीदापुर के ग्राम प्रधान पति जिला पंचयात सदस्य प्रेम पाल गुर्जर ने रुखे व्यवहार के कारण अपनी ग्राम पंचायत इनसे हटवा ली थी।
वर्तमान में सचिव श्यामवीर ब्लाक की सबसे चर्चित और घोटाले बाली ग्राम पंचायत मंगटोरा में तैनात है इस ग्राम पंचायत सपा सरकार में मनमाने तरीक़े से घोटाले किये गए।

वित्तीय  वर्ष 2016-17 में जिला पंचायत से बनाये गए इंटरलॉक रोड का रुपया ग्राम निधि के 14वें वित्त से 3 लाख से ज्यादा निकाल कर उसका गवन कर लिया गया था।इसका खुलाशा होने के बाद वर्तमान में तैनात ग्राम विकास अधिकारी श्यामवीर सिंह इस घोटाले की जांच को बाधित करना चाहते है क्योंकि इनके कार्यकाल 2017-18,2018-19 में भी सोलर लाइट खरीद व हैण्डपम्प रीबोर के नाम पर जमकर गोलमाल किया गया।यदि इंटरलॉक सड़क में हुए लाखों के घोटाले की जांच हुई तो उसके साथ गॉव में हुए अन्य विकास कार्यो की भी जांच हो जाएंगी इसलिए वह इस जांच को बाधित करने का प्रयास कर रहे है।इनके घरेलू ब्लाक में तैनाती के कारण इस घोटाले की जांच होना मुश्किल ही नही नामुमकिन भी लगता है।

लाखों रुपये की सोलर लाइटें बिना टेंडर प्राइवेट दुकानों से खरीदी गई
दरअसल योगी सरकार ने 14वें वित्त आयोग के प्रत्येक गांव में अंधेरा मुक्त करने के लिए सोलर लाइटें लगाने के निर्देश दिए थे,लेकिन इसके साथ यह निर्देश भी दिए थे कि सोलर लाइट खरीदने के लिए टेंडर देना पड़ेगा और इसको सरकारी संस्था नेडा से खरीदा जाएगा लेकिन लाइटों की सप्लाई प्राइवेट एक ही फर्म के जरिए खरीदी गई।
सोलर लाइट के लिए 22 हजार आठ सौ का भुगतान किया गया, जबकि बाजार में इसकी कीमत महज 10 हजार रुपए ही है. नेडा से खरीदने पर कमीशन नही मिलता है लेकिन प्राइबेट फर्मो से खरीदने पर 10 हजार बाली सोलर लाइट में 12 हजार 800 की बचत होती है।
ग्राम पंचायत में विवेक ट्रेडर्स से दो बार में 2 लाख 28 हजार की सोलर लाइटें खरीदी गई।

हैण्डपम्प रीबोर तथा मरम्मत के नाम पर भी निकाले गए 4 लाख 56 हजार 5 सौ 78  रुपये+2 लाख कुल 6.5 लाख ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से निदान के लिए योगी सरकार ने ग्राम निधि से हैण्डपम्प रीबोर व मरम्मत कराने की छूट ग्राम प्रधानों को दे दी थी।लेकिन इस सुबिधा में भी जम कर भृस्टाचार किया गया।
अधोमानक सामिग्री का उपयोग कर हैण्डपम्प की मरम्मत करवा कर रीबोर के नाम का चेक काट लिया और प्रधान और सचिव ने बंदरबांट कर लिया।

ग्राम पंचायत मंगटोरा एक कटरी का गॉव है जहां कभी कल्लू नजजू जैसे डकैतो की शरणस्थली हुआ करती थी।डकैतों के खात्मे के बाद कटरी को खत्म करके खेती लायक जमीन बना दी गई।रामगंगा नदी के किनारे बसे होने के कारण यहां पर केवल 30 फुट या 40 फुट से भी कम बोरिंग कराने पर पानी निकल आता है।इंडिया मार्का हैण्डपम्प में केवल तीन पाइप ही डालने पर बोरिंग पूरी हो जाती है और हैंडपम्प बढ़िया पानी देने लगता है।
इसी का फायदा उठा कर प्रधान और सचिव ने मिलकर लाखों रुपये का गोलमाल कर लिया।इस ग्राम पंचायत में जितने रुपये हैण्डपम्प रीबोर और मरम्मत के नाम पर निकाले गए ग्रामीणों का कहना है कि उतने रुपये में कई नल लगाए जा सकते थे।

वित्तीय वर्ष 2016-17 
4 th वित्त से हैण्डपम्प रिपेयरिंग के नाम पर वर्क आईडी 2255039 से 91,002 रुपया
वित्तीय वर्ष 2017-18
14 वें वित्त से रीबोर के नाम पर 57874
4 थे वित्त से रीबोर के नाम पर वर्क आईडी 4906643 से 1,09,828
मरम्मत के नाम पर वर्क आईडी 4906621 से 1,40,000
रीबोर के नाम पर वर्क आईडी 4906658 से 57,874 रुपया निकाला गया।
4 लाख 50 हजार से ज्यादा की रकम निकाले जाने के बाबजूद अभी भी मरम्मत और रीबोर बाकी है जिसको वित्तीय वर्ष 2018-19 की कार्ययोजना में प्रस्तावित है।

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