आतंकवाद से लड़ाई पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, 'कुर्सी रहे ना रहे, या तो मैं जिंदा रहूंगा या आतंकी' - COVERAGE INDIA

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Sunday, April 21

आतंकवाद से लड़ाई पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, 'कुर्सी रहे ना रहे, या तो मैं जिंदा रहूंगा या आतंकी'


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
पाटन। लोकसभा चुनाव हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार की तमाम उपलब्धियों को जनता के बीच रखना नहीं भूलते हैं। इसी के साथ ही उनका कांग्रेस और समूचे विपक्ष पर हमला भी जारी है। गुजरात के पाटन जिले में रविवार को पीएम मोदी ने जनसभा की। यहां पर उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब अभिनंदन को पाकिस्तान ने पकड़ लिया था तो मैंने उनसे (पाकिस्तान) कहा कि यदि हमारे पायलट को कुछ भी हुआ तो हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे। यह सुनते ही सभा स्थल में मोदी-मोदी के नारे लगने लगे।

पीएम मोदी ने अपील करते हुए कहा, ‘मेरे गृह राज्य के लोगों का कर्तव्य है कि धरती के पुत्र की देखभाल करें, गुजरात में सभी 26 सीटें मुझे दीजिए। मेरी सरकार सत्ता में वापस आएगी लेकिन अगर गुजरात ने बीजेपी को 26 सीटें नहीं दी तो 23 मई को टीवी पर चर्चा होगी कि ऐसा क्यों हुआ। पाटन में आयोजित जनसभा में मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री की कुर्सी रहे या ना रहे लेकिन उन्होंने फैसला किया है कि या तो वह जिंदा रहेंगे या आतंकवादी जिंदा बचेंगे।

पाटन में मोदी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) पर तंज कसते हुए कहा, ‘शरद पवार कहते हैं कि मुझे नहीं पता कि मोदी क्या करेंगे। अगर उन्हें नहीं पता कि मोदी कल क्या करेंगे तो इमरान खान को कैसे पता होगा?’ नरेंद्र मोदी ने जनसभा के दौरान कुंभ मेले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘कुंभ की सफाई की अमेरिका में भी चर्चा हुई। इसके बाद मैं जब वहां गया तो मैंने सफाई कर्मचारियों के पैर धुले।’

चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन से लेकर देश में चुनाव करवाने तक की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। चुनाव आयोग ही राजनीतिक दलों को मान्यता देता है और उनको चुनाव चिह्न प्रदान करता है। मतदाता सूची भी भारत का चुनाव आयोग ही तैयार करवाता है। इसके अलावा राजनीतिक दलों के लिए आचार संहित तैयार करना और उसको लागू करवाना भी चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए भारत के चुनाव आयोग के पास काफी ताकत हैं। आइए आज हम चुनाव आयोग की उन ताकतों को जानते हैं चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो और चुनाव आयुक्त होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की उम्र, दोनों में से जो पहले हो, की आयु तक होता है। अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 साल या 62 वर्ष की उम्र, दोनों से जो पहले हो, तक होता है।

भारत का चुनाव आयोग एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है, जिस तरह भारत का सर्वोच्च न्यायालय है। सरकार इसके कामकाज में दखल नहीं दे सकती है या किसी तरह इसके कामकाज को प्रभावित नहीं कर सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त का दर्जा देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के बराबर होता है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त को आसानी से नहीं हटाया जा सकता है। उनको महाभियोग की प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है। चुनाव आयोग सरकार को भी निर्देश जारी कर सकता है। चुनाव संबंधित नियमों का उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि सत्ताधारी पार्टी सरकारी ताकतों का दुरुपयोग नहीं करे। चुनाव आयोग की ताकत इस बात से भी समझ सकते हैं कि चुनाव के दौरान हर सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के अधीन काम करता है न कि सरकार के अधीन।

देश के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन.शेषन ने यह दिखाया था कि अगर चुनाव आयोग खुद पर आ जाए तो क्या कर सकता है। जब वह देश के मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे, उस समय चुनाव में बूथ कैप्चरिंग, मतदाताओं के बीच पैसे और चीज बांटकर उनको लुभाना, सत्ता का दुरुपयोग, ये सारी चीजें आम बात बन गई थीं। उन्होंने इस सब बुराइयों पर लगाम कसा। देश के चुनाव के इतिहास में पहली बार उन्होंने असरदार ढंग से आचार संहिता को लागू किया। चुनाव के दौरान भुजाबल और धनबल पर लगाम लगाया। जिन उम्मीदवारों ने चुनाव नियमों का उल्लंघन किया उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया और उनको गिरफ्तार करवाया। उन्होंने भ्रष्ट उम्मीदवारों का साथ देने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की।

ऐसे अधिकारियों को उन्होंने निलंबित कर दिया। कई और मौकों पर भी चुनाव आयोग ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। 1984 में कांग्रेस ने दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा को हराने के लिए अमिताभ बच्चन को उतारा था। चुनाव आयोग को लगा कि उनकी फिल्में मतदाताओं को प्रभावित कर सकती हैं। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने दूरदर्शन पर उनकी किसी भी फिल्म के प्रसारण पर रोक लगा दी। सबसे बड़ी यह थी कि उस समय केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी लेकिन चुनाव आयोग ने कोई समझौता नहीं किया। दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘अर्जेंटीना में जी20 की समिट थी, इसमें एक मीटिंग थी- रूस, चीन और भारत की। दूसरी मीटिंग थी- अमेरिका, जापान और भारत की लेकिन इन सभी मीटिंग में खास बात यह थी कि इनमें भारत शामिल था।’

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