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Saturday, April 6

जानिए बीजेपी उम्मीदवार केशरी पटेल के बारे में कुछ रोचक बातें, फूलपुर से हार चुकी हैं चुनाव


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
प्रयागराज। फूलपुर लोकसभा सीट को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों पर आज बीजेपी ने मुहर लगा दी है। भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को फूलपुर लोकसभा सीट से केशरी देवी पटेल को अपना प्रत्याशी घोषित कर ही दिया। यह पहले से ही माना जा रहा था कि भाजपा फूलपुर किला फतह करने के लिए पिछड़े वर्ग का ही प्रत्याशी घोषित करेगी, ऐसा हुआ भी। हालांकि, केशरी देवी पटेल को एक विशेष रणनीति के तहत ही फूलपुर से उम्मीदवार बनाया गया।

या यूं कह लें कि पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। केशरी के सहारे भाजपा ने पिछड़े एवं बसपा के वोट बैंक के ध्रुवीकरण की कोशिश की है।बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने यहां से भारी बहुमत से जीत प्राप्त की थी। हालांकि उपचुनाव में उनके प्रत्याशी को सपा कैंडिडेट से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस बार बीजेपी ने केसरी पटेल पर दांव लगाया है। अब देखना है कि केसरी इस सीट पर केसरिया झंड़ा लहरा पाते हैं या नहीं। बता दें कि केशरी देवी पटेल अपने पुत्र दीपक के साथ बसपा छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई थी।

जानिए केशरी देवी पटेल के बारे में

वर्षों से राजनीति में सक्रिय है केशरी का परिवार

केशरी देवी पटेल प्रयागराज जिले की राजनीति को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं और वर्षों से उनका परिवार राजनीति में सक्रिय है। केशरी देवी पटेल इससे पहले भी फूलपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं, हालांकि तब बाहुबली अतीक अहमद ने उन्हें पटखनी दी थी और वह दूसरे स्थान पर रही थीं, लेकिन इसी चुनाव से तय हो गया था कि आने वाले दिनों में इस सीट से केशरी की दावेदारी सबसे मजबूत होगी। जिसका प्रभाव अब देखने को मिला है और फूलपुर से कई बड़े नामों की दावेदारी के बीच केशरी ने बाजी मारी है।

केशरी देवी का राजनैतिक सफर

केशरी देवी पटेल के राजनैतिक सफर की शुरुआत या कहें की साथी भाजपा ही थी। पहली बार केशरी देवी पटेल भाजपा से जिला पंचायत सदस्य चुनी गयीं। फिर तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर जिला पंचायत अध्यक्ष बन गयी। यहीं से केशरी देवी का कद प्रयागराज की राजनीति में नजर आया और जोड़तोड़ के साथ जातिगत राजनीति में उनकी पैठ की शुरूआत हुई। हालांकि, स्थानीय राजनीति में सपा-बसपा के हावी होने से व लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया और बसपा में ही अपना कद बढ़ाने लगी। जिसका परिणाम यह रहा कि केशरी देवी 4 बार जिला पंचायत अध्यक्ष रही, लेकिन सबसे बड़ा सफर उन्होंने 2004 में तय किया जब उन्हे बसपा ने फूलपुर लोकसभा से टिकट दिया।

फूलपुर से हार गईं चुनाव
फूलपुर लोकसभा चुनाव में केशरी का सामना बाहुबली नेता अतीक अहमद से हुआ जो सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। केशरी देवी ने जातिगत गणित के सहारे अच्छी फाइट भी की, लेकिन मुस्लिम वोटों को एक तरफा मोड़ने व बसपा से मुस्लिम वोटों का पूरी तरह से यहां बिखर जाना केशरी की हार की बड़ी वजह बन गया, जिससे केशरी देवी पटेल इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं। हालांकि, 2014 में बसपा ने फिर से केशरी देवी पर भरोसा जताया और इलाहाबाद संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन इस बार मोदी आंधी में केशरी की बस शाख बच पायी थी और उनकी जीत की उम्मीद पूरी तरह बिखर गयी।


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