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Sunday, April 7

प्रयागराज। 18 शक्तिपीठों में से एक है 'अलोपी मंदिर', दर्शन करते ही पूरी होती है मनोकामना


कवरेज इण्डिया धर्म कर्म डेस्क। 
असंभव की संभावना वह है जो कि हम ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखते हैं। हमारे जीवन में होने वाली बहुत सी चीजें इतनी अद्भुत लगती हैं कि हम उन्हें एक चमत्कार के रूप में मानते हैं। बिल्कुल वैसे ही जैसे इलाहाबाद में अलोपी देवी मंदिर की कहानी। गंगा, यमुना और सरस्वती नदी के पवित्र संगम के पास स्थित यह मंदिर सबसे आश्चर्यजनक मंदिरों में से एक है ।
अलोपी मंदिर 18 शक्तिपीठों में से एक है , जिसे उन सभी शक्तिपीठों में से सबसे पवित्र माना जाता है। मंदिर की विशिष्टता इस तथ्य में निहित है कि यहाँ पूजा करने के लिए किसी भी देवता की कोई मूर्ति स्थापित नहीं है।

अलोपी देवी मंदिर के प्रांगण में, लकड़ी का कुंड है, जिसे नई दुल्हन की “डोली” भी कहा जाता है। इस लकड़ी की शिल्प की पूजा पूरे देश के लोगों द्वारा निष्ठा से की जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव अपनी पत्नी सती के जले हुए शरीर को लेकर पूरे आसमान में भ्रमण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने भगवान शिव के दर्द को दूर करने के लिए अपने चक्र को सती के शव पर छोड़ दिया। तत्पश्चात जहाँ-जहाँ सती के शरीर के अंग गिरे वह सभी स्थान पवित्र हो गये और उन्हें “शक्तिपीठ” के रूप में माना गया। अलोपी देवी मंदिर वह स्थान है जहाँ पर सती के शरीर का अंतिम भाग गिरा था, यहीं से सती का संपूर्ण शरीर लुप्त हो गया था। इसलिए इस जगह को अलोपी के नाम से जाना जाने लगा जिसका मतलब है विलुप्त होना।

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