भीषण अग्निकांड में जिंदा दफन हो गया 16 दिन का नवजात - COVERAGE INDIA

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Sunday, April 21

भीषण अग्निकांड में जिंदा दफन हो गया 16 दिन का नवजात


कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क। 
हल्द्वानी। नवजात के जन्म से घर में खुशियां थीं, लेकिन चंद दिनों में मां-पिता की खुशियों पर ग्रहण लग गया। उत्तराखंड के हल्द्वानी में गौला नदी के बेरीपड़ाव खनन निकासी गेट पर स्थित दो मजदूरों की झोपड़ियों में अचानक आग लग गई थी। इससे एक मजदूर की झोपड़ी में सोए 16 दिन के मासूम की जलकर मौत हो गई। अग्निकांड में दोनों मजदूरों की झोपड़ियां और अंदर रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। आग लगते ही आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए और आग बुझाने में जुट गए।

सूचना के करीब आधे घंटे बाद सेंचुरी और हल्द्वानी से आए फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आग पर काबू पाया। हादसे के बाद दोनों परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। मूलरूप से खुशीनगर गोरखपुर निवासी मनोज पाल (35) पुत्र अग्नू पाल पत्नी रूबी देवी (30), चार वर्षीय मोनू, 6 वर्षीय सोनू और 16 दिन के मासूम राजा के साथ निकासी गेट पर झोपड़ी बनाकर नौ वर्ष से रह रहा है। मनोज पाल रोज की तरह शनिवार को भी गौला में मजदूरी करने गया।
इस दौरान उसकी पत्नी रूबी तीनों बच्चों को घर पर छोड़कर पानी लेने पास स्थित टंकी पर गई थी। उसके दोनों बच्चे मोनू और सोनू बाहर खेल रहे थे, जबकि राजा झोपड़ी के अंदर सोया था। सुबह करीब दस बजे उसकी झोपड़ी में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग ने पास स्थित सुखमनिया (70) पत्नी स्व. राम भजन की झोपड़ी को भी अपनी चपेट में ले लिया। उस समय सुखमनिया बकरियों को चराने के लिए जंगल गई थी।

झोपड़ी में आग लगते ही मोनू और सोनू चिल्लाने लगे। इस बीच, डंपर चालक राधे जोशी एवं विजय वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने आग लगी देखी तो वाहन रोककर दोनों बच्चों को आग से बचाया। हालांकि, उन्हें इस बात का कतई आभास नहीं था कि अंदर एक बच्चा सोया है। इसके बाद आसपास के मजदूर भी मौके पर पहुंच गए और आग बुझाने में जुट गए। उन्होंने अग्निकांड की सूचना फायर ब्रिगेड को दी। साढ़े दस बजे हल्द्वानी और सेंचुरी मिल से फायर ब्रिगेड का एक -एक वाहन मौके पर पहुंचा। दमकल कर्मियों ने आधे घंटे की मशक्कत कर आग पर काबू पाया। इसके बाद मनोज पाल की पत्नी रूबी देवी पानी लेकर वापस पहुंची तो आग लगी देख बदहवास हो गई। उसने बताया कि अंदर उसका 16 दिन का मासूम बच्चा सोया था। अंदर जाकर देखा तो मासूम की मौत हो चुकी थी। साथ ही दोनों झोपड़ियों में रखा सारा सामान कपड़े, बिस्तर, राशन, साइकिल सब कुछ जलकर राख हो गया था।

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